पिछले दो महीनों में खुदरा और थोक महंगाई काफी बढ़ गई है। पेट्रोल और डीजल के दाम भी लगातार बढ़ते गए, क्योंकि रुपया लगातार कमजोर होता गया। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें इस साल लगभग 20 फीसदी बढ़ चुकी है और मई के दौरान क्रूड ऑयल 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चला गया. क्रूड का यह स्तर 2014 के बाद का सर्वाधिक स्तर है।
इसके साथ ही मानसून भी बीच के महीनों में कमजोर हो गया था, लेकिन अब कई हिस्सों में बहुत ही भारी बारिश हो रही है। अबतक पूरे देश में सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश हुई है। अगस्त में मानसून की चाल कमजोर रहेगी। वहीं, पूरे सीजन के लिए मानसून का अनुमान घटाकर सामान्य से 92 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। पहले एजेंसी ने पूरे सीजन में 96 से 104 फीसदी बारिश का अनुमान जताया था।
बरकरार रखा जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 7.4 फीसदी पर बरकरार रखा है। आरबीआई के मुताबिक अप्रैल-सितंबर में जीडीपी ग्रोथ 7.5-7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं, जुलाई-सितंबर के बीच महंगाई दर 4.2 फीसदी रहने का अनुमान है।
अक्टूबर 2013 के बाद यह पहला मौका होगा जब रिजर्व बैंक ने लगातार दो बार ब्याज दरों में इजाफा किया है। अक्टूबर-मार्च के बीच महंगाई दर 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है। मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की अगली बैठक 3-5 अक्टूबर को होगी।
रेपो रेट क्या है
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। जब भी बैंकों के पास कोष की कमी होती है, तो वे इसकी भरपाई करने के लिए केंद्रीय बैंक से पैसे लेते हैं। रिजर्व बैंक की तरफ से दिया जाने वाला यह कर्ज जिस दर पर मिलता है, वही रेपो रेट कहलाता है।
इसे हमेशा से रिजर्व बैंक ही तय करता है। रेपो रेट में कटौती या बढ़ोतरी करने का फैसला मौजूदा और भविष्य में अर्थव्यवस्था के संभावित हालात के आधार पर लिया जाता है।
तीन दिन चली मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि अब तक मानसून की प्रगति तथा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में सामान्य बढ़ोतरी के मुकाबले तीव्र वृद्धि से किसानों की आय बढ़ेगी और अंतत: गांवों में मांग बढ़ेगी।
केंद्रीय बैंक ने कहा, ‘‘कंपनियों खासकर रोजमर्रा के उपयोग का सामान बनाने वाली इकाइयों के बेहतर वित्तीय परिणाम भी ग्रामीण मांग में वृद्धि को प्रतिबिंबित करता है।’’ शीर्ष बैंक ने कहा कि निवेश गतिविधियां मजबूत बनी हुई है। हालांकि हाल की अवधि में वित्तीय स्थिति थोड़ी तंग हुई है।
एफडीआई से मिलेगा बल
मौद्रिक नीति बयान के अनुसार हाल के महीनों में एफडीआई प्रवाह में वृद्धि तथा घरेलू पूंजी बाजार में लगातार तेजी की स्थिति निवेश गतिविधियों के लिहाज से बेहतर है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में गतिविधियां दूसरी तिमाही में मजबूत बने रहने की उम्मीद है। हालांकि इसकी गति थोड़ी नरम हो सकती है।