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Apollo Munich हेल्थ इंश्योरेंस के HDFC Ergo में विलय से पॉलिसी धारकों पर ये पड़ेगा असर

Sat, 11 Jan 2020 01:04 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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अपोलो अस्पताल समूह की सहयोगी स्वास्थ्य बीमा कंपनी अपोलो म्यूनिख इंश्योरेंस का विलय दो दिन पहले हुआ है। अपोलो समूह देश में जाना पहचाना नाम है। कंपनी ने अपनी 51 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी को एचडीएफसी अर्गो को बेच दिया है। इस विलय में कंपनी ने 50.8 फीसदी हिस्सेदारी को 1336 करोड़ रुपये और कुछ कर्मचारियों के पास मौजूद 0.4 फीसदी हिस्सेदारी को 10.84 करोड़ रुपये में बेच दिया था। 

अपोलो के पॉलिसीहोल्डर पर ज्यादा नहीं पड़ेगा असर

हालांकि इस विलय से अपोलो म्यूनिख के मौजूदा पॉलिसीहोल्डर पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल जिनकी पॉलिसी चल रही है, वो पहले की तरह चलती रहेगी। हालांकि रिन्युल के वक्त इस पॉलिसी के नियम व शर्तों में एचडीएफसी अर्गो बदलाव कर सकती है। वहीं कैशलेस क्लेम के लिए नेटवर्क अस्पताल और टीपीए में बदलाव हो जाएगा। 

रिन्युल के वक्त पढ़ लें एक बार सभी नियम व शर्ते

अगर किसी ग्राहक की पॉलिसी अब से कुछ महीनों में रिन्यु होने वाली है, तो फिर वो रिन्युल के वक्त नियम व शर्तों को बारीकी से पढ़ लें, ताकि किसी तरह का नया नियम लागू होने पर इसकी जानकारी हो जाए। लेकिन एचडीएफसी को भी अभी चल रही पॉलिसी में किसी भी तरह का बदलाव करने के लिए बीमा नियामक इरडा से मंजूरी लेनी होगी। वहीं बीमा पॉलिसी ग्राहकों को भी 120 दिन पहले कंपनी को सूचना देनी होगी। 

क्या प्रीमियम में हो सकता है रिन्युल के वक्त इजाफा?

केवल कंपनी के बदलने से प्रीमियम में रिन्युल के वक्त इजाफा हो जाए, ऐसा हो नहीं सकता है।  प्रीमियम में इजाफा होने के लिए कंपनी कई कारण बता सकती है। अगर महंगाई दर में इजाफा होता है तो फिर बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है। अब प्रीमियम केवल क्लेम के इतिहास व उम्र को आधार लेते हुए ही बढ़ाया जा सकता है। नई कंपनी को भी इरडा द्वारा जारी की गईं गाइडलाइंस के हिसाब से ही काम करना होगा। 

कैशलेस क्लेम और नेटवर्क अस्पताल हो सकते हैं प्रभावित

कैशलेस क्लेम और नेटवर्क अस्पतालों की लिस्ट में काफी फेरबदल हो सकता है। किसी भी पॉलिसी होल्डर को लिस्ट चेक करने के बाद ही अस्पताल में दाखिला लेना होगा। इसके लिए आप कंपनी की वेबसाइट पर जाकर के चेक कर सकते हैं। वहीं थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) की लिस्ट को भी चेक करते रहें, क्योंकि आपका टीपीए बदल सकता है। टीपीए ही किसी कंपनी की पॉलिसी के लिए कैशलेस क्लेम को प्रोसेस करता है। 

क्या बंद हो सकती है भविष्य में पॉलिसी?

एचडीएफसी अर्गो फिलहाल दोनों कंपनियों की पॉलिसी को चलाती रहेगी। अपोलो की किसी भी पॉलिसी को एचडीएफसी अर्गो बंद नही करेगी। इसके साथ ही बीमा पॉलिसी का विलय भी नहीं होगा। कंपनी के एमडी रीतेश कुमार ने कहा है कि अगर ग्राहक रिन्युल के वक्त एचडीएफसी की पॉलिसी को लेता हो तो फिर उसको ऐसा करने की आजादी होगी। अपोलो म्यूनिख के पास एचडीएफसी अर्गो की तुलना में काफी अच्छे उत्पाद हैं। 

आगे भी मिलते रहेंगे फायदे

अपोलो म्यूनिख के ग्राहकों को पहले की तरह फायदे मिलते रहेंगे। अगर किसी ग्राहक ने किसी साल में क्लेम नहीं लिया है तो उनको आगे भी पहले की तरह बोनस मिलता रहेगा। वहीं पहले से मौजूद बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड का फायदा भी मिलता रहेगा। 

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