क्लाउडसेक के चीफ टेक्निकल ऑफिसर राहुल ससी ने एशिया टाइम्स को बताया कि कंपनी का एक क्रॉलर (प्रोग्राम) है जो डार्क/डीप वेबसाइट पर नजर रखता है। डार्क या डीप वेबसाइट वे साइट होती हैं जो गूगल या किसी अन्य सर्च इंजन पर इंडेक्स नहीं होती हैं। इन वेबसाइट्स पर गैर कानूनी तरीके से जानकारी को खरीदा और बेचा जाता है।
क्रालर के जरिए हम डेटा को सर्च करके हमारे द्वारा बनाए गए मशीन लर्निंग प्रोग्राम पर भेजते हैं। अगर हमें पता चलता है कि इस डेटा में ऐसा कुछ भी है जो या तो हमारे क्लाइंट के हित में है या संवेदनशील है तो हम इस पर तत्काल एक्शन लेते हैं। क्लाउडसेक ने फिर सरकार की एजेंसी की तरफ पीएनबी को इस मामले की सूचना दी।
यह डाटा हुआ लीक
बैंक के खाताधारकों की जो जानकारी लीक हुई है, उसमें नाम, एक्सपायरी डेट, पिन नंबर और सीवीवी नंबर शामिल है। अभी फिलहाल 10 हजार से अधिक ग्राहकों के खातों में सेंधमारी का पता चला है।