मातृत्व अवकाश विधेयक 2017 में किए गए संशोधन में बच्चा गोद लेने वाली माताओं का भी खयाल रखा गया है। पास विधेयक के मुताबिक अगर 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को कोई मां गोद लेती है या सरोगेसी से बच्चे को जन्म देती है तो उसे भी 12 हफ्तों का अवकाश मिल सकेगा। इसके साथ अब केंद्र सरकार मातृत्व अवकाश के लिए महीनों को अपने आप से तय कर सकेगी।
गोद लेने वाली मां या सरोगेसी से बच्चे को जन्म देने वाली मां की छुट्टियां बच्चे के सौंपे जाने के वक्त से ही तय होंगीं।
कंपनी में बनाने होंगे शिशुगृह
यह कानून अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के मानकों का भी पालन कर पाएगा, जिसमें एक मां के लिए 14 हफ्ते का मातृत्व अवकाश जरूरी बताया गया है। संशोधित कानून में यह प्रावधान भी रखा गया है कि मातृत्व अवकाश खत्म होने के बाद भी विशेष परिस्थितियों में कामकाजी माताओं को घर से काम करने की सुविधा दी जाएगी। जिन स्थानों में 50 या इससे ज्यादा महिलाएं काम करती हैं वहां शिशुगृह (बच्चों की देखभाल के लिए बनाया गया स्थान) भी अनिवार्य किए जाएंगे।