अवैध ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजेक्शन पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा दिए गए एक प्रस्ताव के मुताबिक बैंकों को फंड ट्रांसफर करने से पहले खाताधारकों से मंजूरी लेनी होगी, जिसके बाद ही पैसा खाते में ट्रांसफर हो पाएगा।
फिलहाल यह है व्यवस्था
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल जो व्यवस्था है, उसके अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को रजिस्टर कर सकता है और उस व्यक्ति से बिना मंजूरी के पैसा ट्रांसफर कर सकता है। अभी पैसा ट्रांसफर करने के लिए किसी भी तरह की मंजूरी की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
पड़ेगा असर
अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो फिर इससे फंड ट्रांसफर की संख्या पर असर तो पड़ेगा ही, इसके साथ ही इसमें देरी भी होगी। अभी भीम अथवा यूपीआई एप के अलावा नेशनल इलेक्ट्रोनिक फंड ट्रांसफर (NEFT), रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS), इमिडियेट पेमेंट सर्विस (IMPS) के जरिए फंड ट्रांसफर होता है। इन सभी का लोग ज्यादार पेमेंट करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
सॉफ्टवेयर में करना होगा बदलाव
बैंकिंग एक्सपर्ट के मुताबिक इस प्रस्ताव के अमल में आने के बाद सॉफ्टवेयर में बदलाव करना होगा और इससे फंड ट्रांसफर करने में एक और चरण जुड़ जाएगा। अभी यह भी नहीं पता है फंड ट्रांसफर की अनुमति मिलने तक वो पैसा कहां पर रहेगा। हालांकि इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि गलत खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाएगा। फिनटेक कंपनियों की माने तो ज्यादातर बैंकों का पेमेंट सिस्टम बैंकिंग ट्रांजेक्शन को लंबे समय तक पेंडिंग में नहीं रख सकता है। इससे सर्वर पर भी अतिरिक्त लोड पड़ेगा।