विश्व बैंक ने कहा कि निम्न तथा मध्य आय वाले देशों को प्रवासियों द्वारा भेजा गया धन साल 2017 में 466 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो साल 2016 में 429 अरब डॉलर की तुलना में 8.5 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है।
वहीं, साल 2017 में वैश्विक स्तर पर प्रवासियों द्वारा स्वदेश भेजी जाने वाली रकम (ग्लोबल रेमिटेंस) का आंकड़ा 613 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो साल 2016 में 573 अरब की राशि की तुलना में सात फीसदी अधिक है और इसमें उच्च आय वाले देशों को उसके प्रवासियों द्वारा भेजी जाने वाली राशि भी शामिल है।
485 अरब डॉलर पहुंचेगा ग्लोबल रेमिटेंस
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2018 में प्रवासियों द्वारा स्वदेश भेजी जाने वाली राशि 4.1 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 485 अरब डॉलर पहुंच जाने की उम्मीद है। वहीं वैश्विक स्तर पर प्रवासियों द्वारा स्वदेश भेजी जाने वाली रकम 4.6 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 642 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है।
साल 2018 की पहली तिमाही में प्रवासियों द्वारा 200 डॉलर स्वदेश भेजने की वैश्विक औसत लागत 7.1 फीसदी रही, जो तीन फीसदी के सतत विकास लक्ष्य के दोगुुने से भी अधिक है। पैसे भेजने के मामले में उप-सहारा अफ्रीका सबसे महंगी जगह रहा, जहां पैसे भेजने की औसत लागत 9.4 फीसदी है।
विश्व बैंक ने कहा कि पैसे भेजने की लागत कम करने की अहम बाधाओं में बैंकों द्वारा जोखिम कम से कम करने के लिए उपाय करना तथा नेशनल पोस्ट ऑफिस सिस्टम्स व मनी ट्रांसफर ऑपरेटर्स के बीच एक्सक्लूसिव साझेदारी है। ये कारक इंटरनेट एवं स्मार्टफोन एप, क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल तथा रेमिटेंस सेवाओं में ब्लॉकचेन जैसी अधिक सक्षम प्रौद्योगिकी के लिए बाधक हैं।
लागत कम करने की जरूरत
रिपोर्ट के लेखक दिलीप राठा ने कहा कि प्रवासियों द्वारा स्वदेश भेजे जाने वाली राशि में बढ़ोतरी हो रही है, इसलिए देशों, संस्थानों तथा विकास एजेंसियों को पैसे भेजने में आने वाली उच्च लागत को कम करना चाहिए, जिससे परिवारों को ज्यादा पैसे मिल सकें।
टेबल
देश प्रवासियों द्वारा 2017 में भेजी गई रकम
भारत 69 अरब डॉलर
चीन 64 अरब डॉलर
फिलीपींस 33 अरब डॉलर
मेक्सिको 31 अरब डॉलर
नाईजीरिया 22 अरब डॉलर
मिस्र 20 अरब डॉलर