आमतौर पर समझा जाता है कि पेंशन के लिए सरकारी कर्मचारियों का नेशनल पेंशन सिस्टम में और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में खाता खुलवाया जाता है। लेकिन अब कंपनियां उनका पीएफ अकाउंट खुलवाने के अलावा एनपीएस अकाउंट भी खुलवा रही हैं। इसके लिए पेंशन क्षेत्र के नियामक पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने एक विशेष मॉडल विकसित किया है, जिसे कारपोरेट मॉडल के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा संगठन ऐसे भी प्रयास कर रहा है, जिससे संगठित क्षेत्र के ही नहीं बल्कि असंगठित क्षेत्र के भी अधिक से अधिक व्यक्ति को पेंशन का कवर मिले। अमर उजाला के संवाददाता शिशिर चौरसिया ने पीएफआरडीए के अध्यक्ष हेमंत कांट्रेक्टर से एनपीए के तमाम पहलुओं पर बातचीत की है।। पेश है मुख्य अंश:
प्रश्न- ऐसा कहा जाता है कि एनपीएस में सिर्फ सरकारी कर्मचारियों का खाता खुलता है। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए तो ईपीएफ ही एकमात्र विकल्प है?
उत्तर- नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) की जब देश में शुरूआत हुई थी, तब भले ही ऐसा रहा हो, लेकिन अब स्थिति में बदलाव हो गया है। अब तो हम सरकारी और निजी क्षेत्र, दोनों के कर्मचारियों के लिए हमने खाता खोलना शुरू कर दिया है। निजी क्षेत्र के लिए मॉडल विकसित करने में देरी हुई। सरकारी कर्मचारियों के लिए हमने 1 जनवरी 2004 से एनपीएस खाता खोलना शुरू कर दिया जबकि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए यह दरवाजा दिसंबर 2011 में जाकर खुला।
प्रश्न- निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ईपीएफ अनिवार्य है, ऐसे में एनपीएस क्यों?
उत्तर- सही बात है कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ईपीएफ खाता अनिवार्य है। इसलिए शुरू में हमने इस दिशा में कोई काम नहीं किया। लेकिन बाद में कुछ बड़ी कंपनियों ने हमसे संपर्क किया कि वे अपने कर्मचारियों से बेहतर रिश्ता बनाने केलिए उनका ईपीएफ खाता खुलवाने केसाथ ही एनपीएस खाता भी खुलवाना चाहती हैं। लेकिन उसमें योगदान के विकल्प पर थोड़ा लचीला रुख चाहती थीं। इसके बाद हमने इस दिशा में काम शुरू किया और 2011 में जाकर कारपोरेट मॉडल शुरू किया। उससे एक साल पहले ही हमने बैंक कर्मचारियों केलिए अलग मॉडल बनाया था, जिसमें सरकारी कर्मचारियों केमुकाबले ज्यादा लचीलापन है। इसी को थोड़ा विस्तार देते हुए हमने कारपोरेट सेक्टर के लिए योजना की घोषणा कर दी। इसमें नियोक्ता और कर्मचारियों की अंशदान राशि में काफी विकल्प रखे गए हैं।
प्रश्न- इसमें कारपोरेट सेक्टर का कैसा रिस्पांस रहा?
उत्तर- बहुत बढ़िया रिस्पांस रहा। इतने कम समय में ही देखिए, हमसे 2,300 से ज्यादा कंपनियां जुड़ चुकी हैं। हमसे जुड़ने वाली कंपनियाें में इनफोसिस, टीसीएस, विप्रो, कागनिजेंट और एक्सेंचर जैसी सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज और बहुराष्ट्रीय कंपनियां हैं तो हीरो समूह जैसी खांटी देशी कंपनी भी है। यहां एक बात को समझिए कि इन कंपनियों के जुड़ने का मतलब सभी कर्मचारियों का एनपीएस खाता हो, ऐसा नहीं। कंपनी किसी कर्मचारी को रिवार्ड के रूप में भी पीएफ के अलावा एनपीएस खाते में योगदान दे देती है तो कई कर्मचारी खुद आगे बढ़ कर इसे अपना लेते हैं।
प्रश्न- सरकार ने आपको अटल पेंशन योजना की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन यह योजना पिछड़ रही है। इसमें लोगों की दिलचस्पी क्याें नहीं है?
उत्तर- यह योजना पिछड़ रही है, ऐसा मत कहिए। 15 मार्च 2016 तक इसमें 22.50 लाख खाते खुल चुके थे। हालांकि यह लक्ष्य के मुकाबले काफी कम है। लेकिन हम प्रयासरत हैं कि अधिक से अधिक लोगों को इसके तहत लाएं। इसके लिए हम बैंकों से तो बात कर ही रहे हैं, अन्य फोरम पर भी इसे उठा रहे हैं।
प्रश्न- लोग इसे क्यों नहीं अपना रहे हैं, क्या वजह है?
उत्तर- इसमें ज्यादा खाता नहीं खुलने की वजह लोगों में जागरूकता का अभाव पहला कारण है। भारत में अभी भी ज्यादातर लोग भविष्य के बारे में योजनाएं नहीं बनाते हैं। आम आदमी पेंशन की बात तो करते ही नहीं। उनके मुताबिक पेंशन तो सरकारी कर्मचारियों को मिलता है। लेकिन उन्हें धीरे-धीरे समझा रहे हैं कि पेंशन क्यों जरूरी है। इसके अलावा एक वजह यह भी है कि इसमें 60 साल की उम्र होने तक निवेश करना है। इतने लंबे निवेश से लोग कतराते हैं। पांच या दस साल के लिए निवेश पर तो लोग सहमत हो जाते हैं लेकिन तीस-चालीस साल तक निवेश करने में कतराते हैं।
प्रश्न- फिर कैसे लोगों को जागरूक करेंगे?
उत्तर- हम लोगों को यह बताएंगे कि अटल पेंशन योजना में पेंशन की गारंटी भारत सरकार की है चाहे इस पर रिटर्न शून्य क्यों न हो। जबकि दूसरी पेंशन योजनाओं में ऐसी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए इसमें पेंशन की ऊपरी सीमा 5,000 रुपये प्रति महीने तय की गई है। इसके अलावा इसमें सब्सिडी की भी व्यवस्था है। सरकार ने व्यवस्था दी है कि 31 मार्च 2016 तक जो भी व्यक्ति अटल पेंशन योजना के तहत खाता खुलवाएंगे, उन्हें पांच साल तक हर साल 1,000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी।
प्रश्न- आपकी एनपीएस योजना को बजट में टैक्स में छूट मिली है। इससे क्या उम्मीद कर रहे हैं आप?
उत्तर- इस बार बजट में एनपीएस योजना की परिपक्वता पर निकासी में 40 फीसदी राशि को टैक्स से छूट की सौगात मिली है। यह बहुत बढ़िया कदम है। अब इसमें ज्यादा लोगों का खाता खुलेगा। वैसे भी, योजना की परिपक्वता के समय जो राशि बनती है, उसकी 40 फीसदी राशि का किसी पेंशन फंड में निवेश अनिवार्य है। उसमें से अधिकतम 60 फीसदी राशि को निकाल सकते हैं। अब 40 फीसदी राशि की निकासी टैक्स फ्री हो गई तो लोग ज्यादा आकर्षित होंगे।