भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने एक ही मोबाइल नंबर से लिंक बैंक खातों के बीच यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन पर रोक लगाने का फैसला किया है। कैशबैक पाने के लिए लोगों द्वारा व्यापक पैमाने पर ऐसा करने पर रोक लगाने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। एनपीसीआई ने बैकों को सर्कुलर जारी कर यह व्यवस्था एक अगस्त से लागू करने को कहा है।
एनपीसीआई ने बैंकों को ऐसे यूपीआई लेनदेन पर रोक लगाने के लिए कहा है, जिसमें भेजने वाले और स्वीकार करने वाला एक व्यक्ति या खातों का मालिक एक ही व्यक्ति हो। ऐसे लेनदेन कैशबैक पाने की नीयत से किए जाते हैं।
एक ही नंबर से लिंक खातों में ज्यादा ट्रांसफर
निगम ने सर्कुलर में कहा है कि जब यूपीआई के जरिये होने वाले ऐसे लेनदेन का विश्लेषण किया गया, तो पाया गया कि अधिकतर लेनदेन में डेबिट-क्रेडिट खाते से लिंक मोबाइल नंबर एक ही हैं। ग्राहक अपने एक खाते से दूसरे खाते में पैसे भेजते हैं। इस तरह का लेनदेन सिर्फ यूपीआई में चल रहे कैशबैक को पाने के लिए है और इनका कोई निहितार्थ नहीं है। ऐसे लेनदेन तंत्र पर बेवजह के बोझ के सिवा कुछ भी नहीं है।
एक अगस्त से लग जाएगी रोक
निगम के मुताबिक लेनदेन मूलत: तीन तरह के होते हैं। इसमें एक ही यूपीआई खाते के बीच लेनदेन, यूपीआई आईडी मालिक द्वारा अपने बैंक खातों के बीच लेनदेन और दूसरी यूपीआई आईडी के जरिये लेनदेन, लेकिन इसमें भी बैंक खाता एक ही रहता है।
ऐसे लेनदेन से यूपीआई पर कैशबैक का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, जबकि प्रोत्साहन राशि सिर्फ लोगों को डिजिटल लेनदन की ओर से आकर्षित करने के लिए थी। बैंकों ने एनपीसीआई के सर्कुलर पर काम करना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि एक अगस्त से ऐसे लेनदेन पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
गौरतलब है कि यूपीआई एक भुगतान तंत्र है, जिसे एनपीसीआई ने विकसित किया है। यूपीआई आईएनपीएस के जरिये काम करता है और इससे एक बैंक से दूसरे बैंक तक स्मार्टफोन से ही पैसों को स्थानांतरित किया जा सकता है।