सरकार ने 1983 में बैंकिंग नियमों में बदलाव करके सभी बैंक खातों के लिए नॉमिनेशन की सुविधा खाताधारकों को मुहैया कराई। हालांकि, अब भी कई लोगों को इसकी जानकारी नहीं है और वह अपने खातों के लिए नॉमिनी नहीं चुनते हैं। लेकिन नॉमिनी बनाना जरूरी है और इसकी प्रक्रिया सरल है।
सिंगल अकाउंट या ज्वाइंट अकाउंट के लिए नॉमिनी फॉर्म डीए-1 के जरिए चुना जा सकता है। खाताधारक की मौत के बाद नॉमिनी बनाए गए व्यक्ति को खाते में पड़ी रकम मिलेगी। यह फॉर्म बैंक के हर प्रकार के खाते के लिए लागू होता है।
खाता खोलते समय यह फॉर्म भरा जाता है। अगर ऐसा नहीं किया है, तो बाद में भी फॉर्म भरकर नॉमिनी चुन सकते हैं। यदि नॉमिनी के नाम में बदलाव करना है तो फॉर्म डीए- 3 के जरिए यह किया जा सकता है।
नॉमिनेशन रद्द करने के लिए फॉर्म डीए- 2 का इस्तेमाल होता है। नॉमिनेशन रद्द करते वक्त बेहतर रहेगा कि नए नॉमिनी के लिए तुरंत फॉर्म डीए-1 भर दिया जाए। नॉमिनी में फेरबदल कई बार किए जा सकते हैं।
जरूरी है कि बैंक से नॉमिनेशन भरने की अर्जी की रसीद ली जाए। भरे गए नॉमिनेशन फॉर्म की फोटोकॉपी अपने पास जरूर रखें।