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#Budget2018: नौकरी देने के लिए आ सकती है नई पॉलिसी, हर सेक्टर पर होगी नजर

Fri, 15 Dec 2017 05:33 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला डिजिटल, नई दिल्ली
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देश भर में नौकरियों की संख्या को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार अगले साल लोगों को नया तोहफा देने का ऐलान कर सकती है। इस बार के बजट में एक नेशनल इंप्लायमेंट पॉलिसी का ऐलान हो सकता है, जो सभी सेक्टर और गैर-संगठित व संगठित क्षेत्रों में काम करने वालों के लिए नई नौकरियों का सृजन करेगा। 
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सरकार देगी कंपनियों को प्रोत्सहान
इस पॉलिसी के तहत केंद्र सरकार उन कंपनियों को बढ़ावा देगी, जो अपने यहां ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को नौकरी पर रखेंगे। सभी सेक्टर्स में काम करने वाले कर्मचारियों को सोशल सिक्युरिटी मिले, इसके लिए भी इस पॉलिसी में प्रावधान किया जाएगा। 

तय किया जाएगा पांच साल का टारगेट
इस पॉलिसी में पांच साल के लिए टारगेट तय किया जाएगा और थोड़े-थोड़े अंतराल पर इसकी समीक्षा की जाएगी। अभी देश में रोजगार देने के लिए किसी तरह की कोई पॉलिसी नहीं है, इस वजह से सरकार इसे लेकर के आने वाली है। इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार हर साल करीब 1 करोड़ युवाओं को नौकरी मिलती है। 40 करोड़ लोगों में से केवल 10 फीसदी लोग ही संगठित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। 
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51 तरह के रोजगार ही मिनिमम वेज बिल के दायरे में

बता दें कि अभी 51 तरह के रोजगार पर ही न्यूनतम वेतन कानून लागू है। ये बिल संसद के चालू मॉनसून सत्र में पेश किया जा सकता है। बता दें कि वेजेज कोड चार अलग-अलग कानूनों की जगह लेगा। इसके तहत हर 2 साल में न्यूनतम वेतन की समीक्षा की जाएगी।

क्या पास होगा वेज बिल
श्रम मंत्रालय के सेक्रेटरी एम सत्यवती ने कहा कि उनका मंत्रालय  मजदूरों का भला करने वाले इस बिल को सदन में रखेगा। श्रम मंत्रालय के इस बिल को वित्तमंत्री अरुण जेटली पहले ही हरी झंडी दे चुके हैं।
केंद्र सरकार ने इस बिल को लागू करने के लिए संसद के मानसून सत्र में विधेयक पेश किया था। 

खत्म होगी अलग-अलग मजदूरी की दर
संसद में इस बिल के पास हो जाने के बाद पूरे देश में मजदूरी की दर एक हो जाएगी। अभी कई राज्यों में मजदूरी दर एक समान नहीं है। केंद्र द्वारा मजदूरी की दर तय करने के बाद राज्य सरकारों को कम से कम इतना पैसा मजदूरों के लिए फिक्स करना होगा। 

लोकसभा में पेश किया गया था बिल
सरकार ने मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में वेज बिल को पेश किया था। इसके बाद से ऐसी खबरें आई थी कि अब पूरे देश में न्यूनतम मजदूरी कम से कम 18 हजार रुपये प्रति महीना हो जाएगी। अब मंत्रालय ने अपनी तरफ से स्टेटमेंट जारी करके कहा है कि यह खबर पूरी तरह से गलत और झूठी है।

मंत्रालय ने कहा है यह बिल एक स्थान से दूसरे स्थान पर मिलने वाली मजदूरी को नौकरी के स्किल और काम करने के तरीके पर तय होगा। इसके साथ ही बिल के क्लॉज नंबर 9 (3) के अनुसार केंद्र सरकार न्यूनतम मजदूरी तय करने से पहले सेंट्रल एडवायजरी बोर्ड से सलाह-मशविरा करेगा। इस बोर्ड में कर्मचारियों और फैक्ट्री मालिकों का प्रतिनिधित्व है। 
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