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पूंजी तैयार करने में बेहतर म्यूचुअल फंड

Mon, 04 Feb 2013 03:09 PM IST
अमित तिवारी
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हर माता-पिता की यह ख्वाहिश होती है कि वह अपने बच्चे को अच्छी से अच्छी तालीम दिला सकें। और भला ऐसा क्यों न हो? अपने बच्चे के भविष्य के लिए पढ़ाई सबसे बेहतरीन निवेश है। हालांकि, आज की तारीख में पढ़ाई पर होने वाला खर्च तेजी से बढ़ रहा है। चाहे वह प्राथमिक शिक्षा हो या उच्च शिक्षा। ऐसे में एक अच्छी और सधी हुई वित्तीय योजना आपकी मुश्किलें कम कर सकती है।
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बच्चों की पढ़ाई या उनकी शादी से जुड़े इस बेहद अहम लक्ष्य को हासिल करने का मूल मंत्र यह है कि आप निवेश की शुरुआत जल्द करें। आप जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, निवेश की ग्रोथ के लिए आपके पास उतना अधिक समय होगा। कई लोगों को यह बात नहीं जंचती है कि बच्चों की उच्च शिक्षा या उनकी शादी के लिए दो-तीन साल की उम्र से ही क्यों निवेश किया जाए। लेकिन, असलियत यह है कि निवेश की शुरुआत जल्द करने से लक्षित राशि (टारगेट अमाउंट) को हासिल करना आसान होगा। साथ ही इससे आप पर एकदम से बोझ नहीं पड़ता है।

चूंकि, बच्चे की पढ़ाई या शादी के लिए एसेट्स (संपत्ति) तैयार करना, लंबी अवधि का लक्ष्य होता है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना बेहद अहम हो जाता है कि आप उन माध्यमों में निवेश करें, जो कि आपको मोटा रिटर्न दिला सकें। पढ़ाई की बढ़ती लागत के हिसाब से यह कारक बेहद अहम है। बच्चे की पढ़ाई के लिए पूंजी तैयार करने में म्यूचुअल फंड अच्छे माध्यम साबित हो सकते हैं।
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म्यूचुअल फंडस निवेशकों को डायवर्सिफिकेशन, लचीलेपन की सहूलियत देते हैं। अगर आप नवजात से पांच साल तक की उम्र (बच्चे की उम्र) में निवेश करते हैं, तो आपके पास 13-18 साल की कुल निवेश अवधि होती है। इस स्टेज में निवेश करने पर आपके पास बच्चे के लिए एसेट्स तैयार करने के लिए अधिकतम वक्त होता है। चूंकि, आपके पास अधिक समय होता है, ऐसे में ज्यादा जोखिम उठाते हुए आप सीधे इक्विटी फंड्स में निवेश कर सकते हैं।

वहीं, अगर आप 6-12 साल (बच्चे की उम्र) में निवेश करते हैं तो आपके पास 6-12 साल की निवेश अवधि होती है। इसमें आप इक्विटी फंड्स के साथ बैलेंस्ड फंड्स में दांव लगाएं, तो बेहतर होगा। वहीं, 13-18 साल पर निवेश करने पर आपके पास 1-5 साल का वक्त होगा। चूंकि, ऐसे में आपके पास निवेश की अवधि कम होगी तो कम उतार-चढ़ाव वाले फंड्स में पैसे लगाना बेहतर होगा। जो माता-पिता इक्विटी फंड्स में नियमित आधार पर निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। एसआईपी के जरिए निवेश करने से आपको खासी आसानी होती है।

एसआईपी का सीधा मतलब है कि आप हर महीने एक तय रकम का निवेश करेंगे। जब आप एक निश्चित रकम म्यूचुअल फंड्स में लगाते हैं, तो शेयर की कीमत अधिक होने पर आपको कम यूनिट्स मिलती हैं, जबकि शेयर दाम कम होने पर ज्यादा यूनिट्स आपके हाथ आती हैं। ऐसे में लंबी अवधि में निवेशकों को इसका फायदा मिलता है।

हालांकि, कोई भी फैसला लेने से पहले आपको यह तय करना होगा कि नियमित आधार पर आप कितने पैसे का निवेश आसानी से कर सकते हैं। निवेश की राशि उतनी हो, जिसका निवेश आप लंबी अवधि के दौरान बिना किसी परेशानी के कर सकें। निवेश करते समय शेयर बाजार में गिरावट या उछाल की बातें अपने दिमाग से निकाल दें। साथ ही आप जिस मकसद के लिए निवेश कर रहे हैं, उसका ध्यान रखें। इससे आपको अपने लक्ष्य के प्रति केंद्रित रहने में मदद मिलेगी।
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