निवेशकों को लंबे समय तक म्यूचुअल फंड स्कीम में बनाए रखने के लिए देश के कई म्यूचुअल फंड हाउसों ने एक्जिट लोड बढ़ा दिया है। बढ़ोतरी करने वालों में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, जेपी मॉर्गन और एक्सिस म्यूचुअल फंड शामिल हैं। इस कदम से निवेशकों के लिए तयशुदा समय से पहले फंड की यूनिटें बेचना महंगा हो जाएगा।
शेयर बाजार में तेजी को देखते हुए फंड हाउसों ने यह कदम उठाया है।
अमूमन बाजार में तेजी आते ही खुदरा निवेशक इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं से लाभ कमाकर बाहर निकल जाते हैं। अब एक्जिट लोड में बढ़ोतरी कर फंड हाउसों की योजना खुदरा निवेशकों को इक्विटी फंड में लंबे समय तक रोकने की है। निवेशकों ने सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं से 3,559 करोड़ रुपये निकाल लिये। पिछले ढाई साल का यह सर्वाधिक स्तर है।
एसेट मैनेजमेंट कंपनी आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल एमएफ, जेपी मॉर्गन एमएफ और एक्सिस बैंक ने अपने एक्जिट लोड में बढ़ोतरी कर दी है। अन्य दूसरे फंड हाउस भी जल्द ही यह कदम उठा सकते हैं। जेपी मॉर्गन एमएफ ने जेपी मॉर्गन इंडिया इक्विटी फंड सहित अपनी कम से कम पांच योजनाओं पर एक्जिट लोड बढ़ा दिया है।
फंड हाउस की नए दरों के मुताबिक, फंड अलाटमेंट की तिथि से छह माह के भीतर उससे बाहर निकलने पर 3 फीसदी एक्जिट लोड देना होगा। 12 माह तक बने रहने के बाद यदि यूनिट बेची जाती हैं, तो एक्जिट लोड 2 फीसदी और 18 माह के भीतर इक्विटी फंड से बाहर निकलने पर 1 फीसदी एक्जिट लोड होगा। संशोधित दरें 12 अक्तूबर से प्रभावी हो गईं।
वहीं, इस माह की शुरुआत से आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल ने छह माह के पहले इक्विटी फंड से निकले पर एक्जिट लोड 3 फीसदी कर दिया है। 6-18 माह के बीच स्कीम से बाहर निकलने पर फंड हाउस 2 फीसदी एक्जिट लोड लेगा। 18 माह के बाद कोई एक्जिट लोड चार्ज नहीं किया जाएगा।
इसी तरह, एक्सिस म्यूचुअल फंड ने भी कुछ योजनाओं से छह माह के भीतर बाहर निकलने पर 3 फीसदी एक्जिट लोड कर दिया है। जबकि 6-12 की अवधि के बीच एक्जिट लोड 2 फीसदी और 12-24 माह के बीच 1 फीसदी हो गया है।