देश में जितने लोगों के बैंक खाते हैं, उनसे अधिक लोगों के पास मोबाइल फोन हैं। इंटरनेट से जुड़ने की वजह से मोबाइल धीरे-धीरे पर्सनल कंप्यूटर की जगह लेता जा रहा है। इन संभावनाओं पर ही बैंकों की नजर है।
मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों के साथ हाथ मिलाकर बैंकों ने आपके मोबाइल फोन को मोबाइल बटुए (मोबाइल वॉलेट यानी एम-वॉलेट) में बदलना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत कुछ साल पहले आपके खाते में जमा और निकासी की जानकारी एसएमएस के जरिए पहुंचाने से हुई थी। आज बैंकों के बीच मोबाइल पर ज्यादा से ज्यादा सेवाएं देने की होड़ लगी है।
कैसे काम करता है एम-वॉलेट
जिस तरह प्लास्टिक के क्रेडिट कार्ड ने कैश की जगह ली थी, अब मोबाइल फोन प्लास्टिक मनी की जगह ले रहा है। बैंक कई ऐसी सुविधाएं मोबाइल फोन पर उपलब्ध करा रहे हैं, जिनके लिए आपको बैंक शाखा के चक्कर लगाने पड़ते थे। अगर आप मोबाइल वॉलेट से जुड़े हैं तो इंटरनेट के बिना ही कहीं से भी लेन-देन कर सकते हैं। मोबाइल वॉलेट सेवा के क्षेत्र में एयरटेल जैसी टेलीकॉम कंपनियां भी उतर चुकी हैं, जबकि ऑक्सीकैश और पे-मेट इस क्षेत्र के पुराने दिग्गज हैं।