मोबाइल फोन सेवा कंपनियां थ्री जी सेवा के नाम पर बदतर सेवाएं उपभोक्ताओं को उपलब्ध करा रही हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, तेजी से डाउनलोड की सुविधा और मोबाइल पर आमने सामने बातचीत के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
कनेक्टिविटी की बात हो या फिर नेटवर्किंग की, थ्री जी सेवा हर कसौटी पर विफल साबित हो रही है। मगर कंपनियां ग्राहकों की शिकायत सुनने को तैयार नहीं हैं। नतीजतन, शिकायतों का अंबार लग रहा है और नतीजा सिफर ही है।
ग्राहक फोरम से संबंधित वेबसाइटों पर ऐसी शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। ग्राहकों की लाख शिकायत के बाद भी कंपनियां उनकी सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। तृप्ति गुप्ता ने वोडाफोन की थ्री जी इंटरनेट सेवा अपने मोबाइल पर ली थी। मगर उनकी दिक्कत है कि इंटरनेट स्पीड बेहद कम है। तृप्ति की शिकायत है कि यह सेवा थ्री जी स्तर की नहीं है।
दिल्ली की आरती की भी यही समस्या है। वह एयरटेल की ग्राहक हैं। तृप्ति और आरती की तरह विभिन्न मोबाइल सेवा कंपनियों के ऐसे हजारों ग्राहक है, जिन्होंने अपनी परेशानी का जिक्र ग्राहकों की शिकायतों से संबंधित वेबसाइटों पर किया है। थ्री जी सेवा पर मोबाइल सेवाओं की कनेक्टिविटी और नेटवर्किंग टू जी सेवा से भी बदतर है। जबकि टू जी और थ्री जी सेवाओं की कीमतों में काफी अंतर है।
ग्राहकों की तो यहां तक शिकायत है कि उनसे इंटरनेट सर्फिंग के नाम पर ज्यादा भुगतान लिया जा रहा है। कंपनियों की तरफ से कहा जाता है कि उनको इतने रुपये में एक जीबी मुफ्त मिलेगी। यानी आप अगर एक जीबी से ज्यादा से डाउनलोड करेंगे, तो उसके बाद आपको अलग से भुगतान देना होगा। मगर मुफ्त एक जीबी की सीमा बेहद जल्द खत्म हो जाती है।
ग्राहकों की शिकायत है कि कंपनियां डाउनलोड ही नहीं बल्कि इंटरनेट सर्फिंग करने का भी चार्ज कर लेती हैं। एक बड़ी कंपनी के अधिकारी तो ऐसी शिकायतों को मानने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि उनके पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है।
ग्राहकों की शिकायतों को लेकर उपभोक्ता संगठनों ने भी कई बार भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई से शिकायत की मगर नतीजा सिफर ही रहा है। ट्राई के अंतर्गत रजिस्टर्ड सब्सक्राइबर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रंधीर वर्मा कहते हैं कि थ्री जी सेवा के लिए मजबूत ढांचा चाहिए। मसलन टू जी सेवा के लिए एक मोबाइल टॉवर चाहिए। तो थ्री जी के लिए तीन टॉवरों की जरूरत है और कंपनियां थ्री जी के नाम पर ग्राहकों बेवकूफ बना रही हैं। वह अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत ही नहीं कर रही है।
उनके पास ग्राहकों की शिकायतें आई है कि एक-दो किलोमीटर के अंदर वीडियो कॉल का संपर्क टूट जाता है। दोबारा कॉल करनी पड़ती है और कंपनियां ज्यादा चार्ज कर रही हैं। वर्मा कहते है कि सरकार को भी कंपनियां के इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी करनी चाहिए। खराब सेवा के चलते भी थ्री जी सेवा देश में अपनी जगह नहीं बना पा रही है।
2012 की पहली तिमाही तक देश में थ्री जी सेवा के तीन करोड़ तीस लाख ग्राहक थे। जो कि कुल 92 करोड़ मोबाइल ग्राहकों का चार फीसदी से भी कम है। टेलीकॉम विशेषज्ञ सुधीर उपाध्याय कहते हैं कि बेहतर कनेक्टिविटी का न होना ही थ्री जी सेवा के फ्लॉप होने की बड़ी वजह है। इसे लेकर सरकार और कंपनियों को ध्यान देना होगा।