आयकर के कानून में एचयूएफ यानी हिंदू अविभाजित परिवार की खास व्यवस्था है जिसके जरिए कोई भी शादीशुदा हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध अधिक टैक्स बचा सकते हैं। एचयूएफ बनाने के लिए कुछ खास शर्तें हैं जिसके बाद इसका लाभ लिया जा सकता है।
आसान है एचयूएफ बनाना
एचयूएफ (हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली) बनाने के लिए शादी करना जरूरी है। शादी के साथ ही एचयूएफ बनाने की मूल शर्त पूरी हो जाती है और शादी की तारीख को ही एचयूएफ की जन्म तिथि मानी जाती है। शादी के तुरंत बाद एचयूएफ का खाता खोला जा सकता है और इसके लिए अलग पैनकार्ड का आवेदन दिया जा सकता है। एचयूएफ पहली शर्त है शादी, बच्चे हों या न हों कोई फर्क नहीं पड़ता।
कर्ता होता है एचयूएफ का प्रतिनिधि
सामान्य स्थिति में परिवार का पुरुष मुखिया एचयूएफ का कर्ता होता है। खास परिस्थितियों में महिला भी कर्ता की भूमिका निभा सकती हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने इसके लिए व्यवस्था दी है।
अलग एसेसी होता है एचयूएफ
बैंक खाता और पैन कार्ड पर परिवार के मुखिया के नाम के आगे कर्ता लिखा होता है। जैसे अगर रविशंकर नाम का व्यक्ति परिवार का मुखिया है तो उसके एचयूएफ पैनकार्ड पर और बैंक खाते पर उसका नाम रविशंकर एचयूएफ लिखा होगा और पैनकार्ड पर उसकी जन्मतिथि की जगह उसकी शादी की तारीख लिखी होगी।
कैसे होती है आयकर में बचत
एचयूएफ के गठन के बाद अपनी आय पर आदमी दो प्रकार से फायदा ले सकता है एक तो व्यक्तिगत और दूसरा एचयूएफ के सदस्य के नाते। इस प्रकार एक व्यक्ति 2 लाख की कर छूट का फायदा व्यक्तिगत और दूसरी बार 2 लाख का फायदा एचयूएफ के रूप में ले सकता है।
आयकर छूट लेने में 80सी के विकल्पों का भी सीमित उपयोग एचयूएफ में किया जाता है। जैसे अब एचयूएफ के नाम से पीपीएफ खाता नहीं खोला जा सकता, लेकिन एचयूएफ चाहे तो सदस्यों के पीपीएफ खाते में रकम जमाकर कर रियायत ले सकता है।