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PPF-NSC जैसी सरकारी योजनाओं पर ब्याज दरें घटीं, मुनाफे के लिए क्या करना चाहिए?

Thu, 02 Apr 2020 04:46 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हर तीन महीने पर स्मॉल सेविंग्स यानी सरकार की देख रेख में चलने वाली छोटी बचत योजनाओं के ब्याज को कम या ज्यादा करने का फैसला होता है। ज्यादातर विद्वानों का मानना था कि पिछली तिमाही में ही ये रेट कम होने के हालात बन चुके थे मगर सरकार ने तब न जाने यह फैसला क्यों नहीं किया।

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तब नहीं किया तो अब हो गया। लेकिन ये फैसला एक ऐसे वक्त पर हुआ है जहां इसका शोर तो बहुत कम हुआ मगर मार बहुत गहरी लगेगी।

खासकर उन लोगों को जो ब्याज की कमाई के भरोसे ही गुजारा कर रहे हैं।

इसमें खासकर वो लोग ज्यादा हैं जिनको या तो पेंशन बिलकुल नहीं मिलती, या जो मिलती है उससे उनका गुजारा नहीं होता।

ऐसे बहुत से लोगों ने अपनी नौकरी के दौरान बचत करके, रिकरिंग डिपाजिट या फिक्स्ड डिपाजिट खोलकर पैसा जमा किया।

और बहुत से तो ऐसे भी हैं जिन्होंने हमेशा से या तो पोस्ट ऑफिस के खाते में ही पैसा रखा, या फिर टाइम डिपॉजिट या रिकरिंग डिपॉजिट के सहारे बचाया।

मध्य वर्ग क्यों लगाता है इन स्कीमों से उम्मीद?
फिर ऐसे लोगों की गिनती भी कम नहीं है जो टैक्स बचाने के लिए बरसों नैशनल सेविंग सर्टिफिकेट या एनएससी खरीदते रहे और उम्मीद करते रहे कि जब उनकी कमाई बंद हो जाएगी तो इस बचत से होने वाली कमाई से उनका खर्च चल जाएगा।

इस उम्मीद का आधार भी था। अब से बीस साल पहले इन स्कीमों में टैक्स छूट भी मिलती थी और बाजार से ऊंचा ब्याज भी।

साढ़े आठ फीसदी से लेकर दस फीसदी तक का ब्याज हुआ करता था। किसान विकास पत्र पर तो 10.3 फीसदी ब्याज मिलता था। ये दो फायदे और सरकार की गारंटी।

इतना काफी था लोगों को इन स्कीमों की तरफ खींचने के लिए। और इसीलिए मिडल क्लास और लोअर मिडल क्लास के बहुत से लोग इन स्कीमों में पैसा लगाते थे।

साल 2018-19 के अंत तक इन स्कीमों में उन्नीस लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा थी।

आशंकाओं का दौर
पिछले काफी समय से ब्याज दरों में गिरावट का असर इन स्कीमों पर भी पड़ ही रहा था।

लेकिन साथ ही बैंकिंग इंडस्ट्री की तरफ से भी सरकार पर लगातार दबाव था कि इनका रेट घटाया जाए।

वजह ये थी कि इनका रेट ऊंचा रहने पर लोग बैंक में पैसा रखने की बजाय इन योजनाओं की तरफ खिंचते हैं।

यही वजह है कि पिछली तिमाही में ही ये अनुमान लग रहा था कि रेट कटौती हो सकती है, और इस बार तो यह होना तय ही था।

मगर जिसकी जेब पर मार पड़ रही है उसे सरकार के तर्क से क्या लेना देना।

उन्हें तो साफ दिख रहा है कि इस मुसीबत की घड़ी में कमाई का एक और साधन कमजोर पड़ रहा है।

यही वजह है कि वो इससे परेशान हो रहे हैं और सरकार पर सवाल उठाने वालों को भी मौका मिल गया है।

कांग्रेस ने इस फैसले को आश्चर्यजनक और बेतुका बताया है और मांग की है कि रेट वापस पुरानी दरों पर पहुंचाए जाएं।

कौन कितने घाटे में?
राजनीतिक बयानबाजी तो होती रहेगी, लेकिन पहले ये हिसाब लगा लेना जरूरी है कि कौन कितने घाटे में है।

तो देखिए सबसे तगड़ी कटौती हुई है एक से तीन साल अवधि वाले पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट के रेट में। ये एक तरह से पोस्ट ऑफिस की एफडी ही है।

इनपर अभी तक 6.9 फीसदी ब्याज था जो घटकर 5.5 फीसदी रह गया है। यानी पूरे 1.4 फीसदी की कटौती। इतनी ही कटौती पोस्ट ऑफिस में पांच साल के रिकरिंग डिपॉजिट पर भी हुई है।

उसका रेट अब 7.2 फीसदी से घटकर 5.8 फीसदी रह गया है। इसके बाद नंबर आता है बुजुर्गों की बचत यानी सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम का।

इस पर ब्याज 8.6 फीसदी से घटाकर 7.4 फीसदी कर दिया गया है। हालांकि अब भी ये ब्याज बाजार को देखते हुए काफी संतोषजनक है।

एनएससी यानी राष्ट्रीय बचत पत्र को भी 1.1 फीसदी का झटका लगा है।

पांच साल के टाइम डिपॉजिट और मंथली सेविंग स्कीम की ब्याज दर में एक एक परसेंट की कटौती हुई है जबकि सुकन्या समृद्धि योजना और पीपीएफ पर ब्याज में 0.8 फीसदी की कटौती हुई है।

पीपीएफ पर अब 7.9 की जगह सिर्फ 7.1 फीसदी की दर से ही ब्याज मिलेगा। और किसान विकास पत्र के ब्याज में कटौती थोड़ी घुमावदार रास्ते से है।

अब ये 113 महीने की जगह 124 महीने में मैच्योर होगा। यानी रकम दोगुनी होकर मिलने में अब इतना वक्त लगेगा।
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ग्राहकों के विकल्प
ये तो रहा कटौती का हिसाब किताब। ज्यादातर मामलों में यहां ग्राहक के हाथ में कोई खास विकल्प है नहीं।

क्योंकि इन स्कीमों में पैसा एक खास समय के लिए जमा है और उससे पहले निकल नहीं सकता। हां पोस्ट ऑफिस के बचत खाते में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

वहां ब्याज चार फीसदी ही रहेगा। तो अब रहा सवाल कि करना क्या है। तो जवाब बहुत मुश्किल नहीं है।

इन हालात में आगे जाकर ब्याज बढ़ने के कम और घटने के आसार ज्यादा हैं।

यानी अब भी जो सबसे अच्छा ब्याज मिल रहा है, पैसा उसी स्कीम में लॉक करना ही समझदारी है।

खासकर सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम का ब्याज अब भी अच्छा है, और जो लोग आज पैसा इसमें लगा देंगे उनका ब्याज इसी रेट पर लॉक हो जाएगा।

जबकि पीपीएफ का रेट कम ज्यादा होता रहता है।

इसके अलावा जो लोग बाजार को अच्छी तरह समझते हैं या जिनके पास कोई अच्छा इन्वेस्टमेंट एडवाइजर है, वो ये भी सोच सकते हैं कि सरकारी बॉन्ड में 7.75 फीसदी तक के ब्याज या आरईसी और एनएचएआई जैसे टैक्स फ्री बॉन्ड बाजार से अच्छे दाम पर खरीदें. लेकिन यह रास्ता हरेक के लिए नहीं है।

कुछ प्राइवेट बैंक इस वक्त सेविंग अकाउंट पर ही सात परसेंट ब्याज दे रहे हैं। कब तक देंगे पता नहीं, लेकिन उन्हीं बैंकों में एफडी पर उससे कुछ ज्यादा तो मिल ही रहा होगा।

जो आज के समय में अच्छा रिटर्न है। सावधानी का साथ न छोड़ते हुए अपनी बचत का कुछ हिस्सा ऐसी जगह भी लगाना बुरा नहीं रहेगा।
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