भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस संकट के कारण कर्ज अदायगी पर ऋण स्थगन को तीन और महीनों के लिए अगस्त तक बढ़ा दिया गया है, ताकि कर्जदारों को राहत मिल सके।
इससे पहले मार्च में केंद्रीय बैंक ने एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 के बीच सभी सावधि ऋण के भुगतान पर तीन महीनों की मोहलत दी थी। इसके साथ ही इन तरह के सभी ऋणों की अदायगी को तीन महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।
ऋण स्थगन के तहत लोगों से कर्ज के लिए उनके खातों से ईएमआई नहीं ली गई। रिजर्व बैंक की ताजा घोषणा के बाद 31 अगस्त को ऋण स्थगन की अवधि खत्म होने के बाद ही ईएमआई भुगतान शुरू होगा।
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क्या है लोन मोरेटोरियम पीरियड?
आरबीआई द्वारा दी गई लोन मोरेटोरियम की सुविधा के तहत अब ग्राहक छह महीने (मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई और अगस्त) के लिए अपने लोन की ईएमआई टाल सकते हैं। यानी अगर आपने बैंक से किसी भी प्रकार का लोन लिया है, तो आपको अपनी जरूरत के अनुसार, छह माह तक के लिए लोन की ईएमआई का भुगतान नहीं करने का विकल्प मिलेगा।
बढ़ेगी लोन की अवधि
ध्यान रहे कि अगर आप किस्त न चुकाने का विकल्प चुनते हैं, तो आपके लोन की अवधि छह महीने बढ़ जाएगी और इन छह महीने के दौरान लगने वाला ब्याज भी आपसे वसूला जाएगा। आगे की ईएमआई के साथ यह ब्याज जोड़ दिया जाएगा।
क्या इससे क्रेडिट रेटिंग (सिबिल स्कोर) पर फर्क पड़ेगा ?
अगर आप अप्रैल से अगस्त तक ईएमआई का भुगतान नहीं करते हैं, तो इससे ग्राहकों की क्रेडिट रेटिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इन छह महीने अगर आप अपनी ईएमआई नहीं चुकाते हैं, तो आपका लोन डिफॉल्ट या एनपीए कैटेगरी में नहीं माना जाएगा।