वेज बिल पर सफाई देते हुए श्रम मंत्रालय ने कहा है कि सरकार की तरफ से किसी तरह की कोई न्यूनतम राशि मजदूरी के तौर पर तय नहीं की गई है। मंत्रालय ने कहा है कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया है कि इस बिल के माध्यम से पूरे देश में न्यूनतम मजदूरी या फिर 18 हजार रुपये प्रति महीना फिक्स कर दी गई है, जो कि पूरी तरह से निराधार है।
लोकसभा में पेश किया गया था बिल
सरकार ने पिछले महीने मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में वेज बिल को पेश किया था। इसके बाद से ऐसी खबरें आई थी कि अब पूरे देश में न्यूनतम मजदूरी कम से कम 18 हजार रुपये प्रति महीना हो जाएगी।
अब मंत्रालय ने अपनी तरफ से स्टेटमेंट जारी करके कहा है कि यह खबर पूरी तरह से गलत और झूठी है। मंत्रालय ने कहा है यह बिल एक स्थान से दूसरे स्थान पर मिलने वाली मजदूरी को नौकरी के स्किल और काम करने के तरीके पर तय होगा।
इसके साथ ही बिल के क्लॉज नंबर 9 (3) के अनुसार केंद्र सरकार न्यूनतम मजदूरी तय करने से पहले सेंट्रल एडवायजरी बोर्ड से सलाह-मशविरा करेगा। इस बोर्ड में कर्मचारियों और फैक्ट्री मालिकों का प्रतिनिधित्व है।