दीवान सिंह बिष्ट की फर्नीचर की दुकान ने अच्छे दिन देखे हैं। लेकिन पिछले छह महीने से 33 वर्षीय दीवान सिंह की हालत खराब है। उनके पास अब नए फर्नीचर की मांग के बजाय पुराने फर्नीचर की मरम्मत की मांग ज्यादा आती है। लेकिन उनके घर खर्च में कोई कमी नहीं आई है। और उस पर उनके बेटे की स्कूल फीस बकाया है, जिस कारण वह 10 साल पुराने अपने पीपीएफ खाते से पैसे निकालना चाहते हैं, जिसमें 4.1 लाख रुपये हैं।
पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन रहता है और रिटायरमेंट सेविंग्स की इस योजना में रखे गए पैसे पर आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। यह बैंक डिपॉजिट की तरह काम करता है और इसमें जमा पैसे पर सालाना फिक्स्ड ब्याज मिलता है, जो इस समय 7.1 फीसदी है। दूसरी फिक्स्ड रिटर्न बचत योजनाओं की तरह पीपीएफ की ब्याज दर भी साल दर साल कम हुई है।
पीपीएफ खाते से निकासी वैसे तो पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन रहता है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में उससे पहले भी रुपये निकाल सकने का प्रावधान है। उदाहरण के लिए, खाता खोलने के पांच साल बाद खाताधारक इससे रुपये निकाल सकता है। लेकिन यह निकासी चौथे साल के आखिर में जमा राशि के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। मेडिकल इमर्जेंसी या शिक्षा खर्च के कारण खाताधारक पांच साल बाद पीपीएफ खाता स्थायी रूप से बंद भी कर सकता है।
पीपीएफ निकासी के नियम और परिदृश्य
| निकासी |
अवधि |
निकासी
की वजह |
राशि |
| खाता मैच्योर होने के बाद। |
खाता खोलने के 15 साल
बाद। |
कुछ भी। |
पूरी राशि। |
| आंशिक निकासी। |
खाता खोलने के पांच साल
बाद। |
कुछ भी। |
जमा राशि का
50 फीसदी। |
| समय से पहले खाता बंद करना। |
खाता खोलने के पांच साल बाद। |
शैक्षिक, चिकित्सकीय। |
पूरी राशि। |
पीपीएफ खाते से कर्ज
आपके पीपीएफ खाते में जमा रुपये के आधार पर आप कर्ज ले सकते हैं, जिस पर आपको 1 फीसदी की दर से ब्याज चुकाना होगा। पर तब आपको जमाराशि पर जो ब्याज मिलता है, वह नहीं मिलेगा। अगर आपको 7.1 फीसदी ब्याज मिलता है, तो कर्ज पर ब्याज की दर 8.1 फीसदी हो जाएगी। आपको यह कर्ज भी खाता खोलने के तीन साल बाद मिलेगा, जिसे छठे साल तक चुका देना होगा। कर्ज भी दूसरे साल के अंत की कुल जमा राशि का 25 फीसदी मिलेगा और तीन साल में इसे चुका देना पड़ेगा।
इसे एकमुश्त या दो मासिक किस्तों के जरिये चुकाया जा सकता है। ब्याज की राशि भी एकमुश्त या दो मासिक किस्तों में चुकाई जा सकती है। कर्ज लें या रुपये निकालें? दीवान सिंह बिष्ट को पीपीएफ खाते से कर्ज लेने के बजाय रुपये निकालना चाहिए।
पीपीएफ खाते में जमा राशि के आधार पर लिए गए कर्ज की कीमत अदा करनी पड़ती है, इसके अलावा वह कर्ज चुकाना भी पड़ता है। दीवान सिंह की आय घट गई है। ऐसे में, कर्ज चुकाना कठिन हो सकता है। ऐसी स्थिति में कर्ज लेने के बजाय पीपीएफ खाते से रुपये निकालना उनके लिए बेहतर विकल्प है।
- कल आप पढ़ेंगे कि अपने भविष्य की आर्थिक जरूरतों की पूर्ति कैसे करें?
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