कोरोना वायरस महामारी की वजह से दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। इस मुश्किल दौर में वित्तीय जानकारों का कहना है कि कोरोना काल में ऐसे विकल्पों में निवेश करें, जहां पैसा सुरक्षित रहे और अच्छा रिटर्न मिलता रहे।
ऐसे संकट के समय में चुनिंदा कंपनियों पर दांव लगाने के बजाय सेंसेक्स या निफ्टी जैसे सूचकांकों को फॉलो करना बेहतर निवेशकों के लिए बेहतर साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें इंडीविजुअल कंपनियों की तुलना में उतार-चढ़ाव का खतरा थोड़ा कम होता है। इसके पैसिव फंड आपकी मदद करेगा। पैसिव फंड्स में निवेश है बेहतर रणनीति है।
मालूम हो कि सूचकांक अलग-अलग सेक्टर्स व बेहतर प्रदर्शन कर रही कंपनियों के उचित प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर सांख्यिकीय पद्यतियों से तैयार किए जाते हैं। साथ ही नियमित रूप से इनकी समीक्षा भी की जाती है। यही कारण है जिसकी वजह से लंबी अवधि में पैसे कमाने के लिए बेंचमार्क सूचकांक किया गया निवेश लाभदायक होता है। हालांकि सूचकांक खरीद या बिक्री करने के लिए इंस्ट्रूमेंट नहीं होते।
सामान्य म्यूचुअल फंड की तुलना में ऐसे है बेहतर
सामान्य म्यूचुअल फंड को फंड मैनेजर मैनेज करते हैं, जबकि पैसिव फंड बेंचमार्क इंडेक्स की तरह काम करते हैं। सामान्य फंड बेहतर या खराब रिटर्न दे सकते हैं।, लेकिन पैसिव फंड में रिटर्न बेंचमार्क इंडेक्स जैसे होते हैं। सामान्य म्यूचुअल फंड में निवेश पर चार्ज 2.25 से 2.50 फीसदी लगता है, जबकि पैसिव फंड में 0.50 से 0.75 फीसदी।
सूचकांक को ट्रैक करता है पैसिव फंड
निवेशक इसके लिए पैसिव फंड का सहारा ले सकते हैं, जो म्यूचुअल फंड का एक प्रकार है। ध्यान रहे कि पैसिव फंड में किस कंपनी के शेयर में कितना निवेश करना है, यह फंड मैनेजर खुद तय नहीं करता है। बल्कि वह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स या नेश्नल स्टॉक एक्सचेंड (एनएसई) के इंडेक्स निफ्टी-50 जैसे किसी सूचकांक को ट्रैक करता है।
सूचकांक में जिस कंपनी की जितनी हिस्सेदारी होती है, उसी के अनुपात में निवेश की राशि उन कंपनियों के शेयरों में निवेश कर दी जाती है। पैसिव फंड का एक उदाहरण ईटीएफ या इंडेक्स फंड भी है। संकट के समय में गलत निवेश के चयन का खतरा बढ़ जाता है। ना सिर्ख नए निवेशक, बल्कि फंड मैनेजर भी गलती कर सकते हैं। लेकिन पैसिव फंड्स में निवेश कर जोखिम को कम किया जा सकता है।
पैसिव फंड्स में निवेश करने का एक फायदा सरलता भी है। इससे निवेशकों को अपने निवेश की परफॉर्मेंस ट्रैक करने में आसानी रहती है। इसके तहत निवेशकों को मुनाफे और नुकसान की दिशा में स्पष्ट नजरिया प्राप्त हो जाती है।