वित्तीय योजना बनाने से पहले कर संबंधी पहलुओं को बारीकी से समझ लेना चाहिए। कई वित्तीय उत्पादों पर आय करमुक्त होती है, तो कई पर कर देना होता है। बच्चा नाबालिग है, तो यह आय अभिभावक की आय में शामिल होती है।
बैंक या डाकघर में यदि आप अपने बच्चे के नाम रेकरिंग डिपाजिट खाता या एफडी कराते हैं, तो इनसे होने वाली आय अभिभावक की आमदनी में जुड़ेगी और इस पर संबंधित टैक्स स्लैब के अनुसार कर चुकाना पड़ता है। जबकि, पीपीएफ का रिटर्न पूरी तरह करमुक्त होता है। इसी तरह, पारंपरिक जीवन बीमा चाइल्ड प्लान की परिपक्वता पर होने वाली आय करमुक्त होती है। यूलिप चाइल्ड प्लान पर भी आय करमुक्त होती है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इनसे प्राप्त आमदनी कर के दायरे में आती है। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड में बैलेंस फंड पर दीर्घ अवधि में प्राप्त आय करमुक्त होती है। जबकि एमआईपी और डेट फंड पर कर देयता बनती है।
मान लीजिए, राम, मोहन और श्याम विभिन्न वित्तीय उत्पादों में 1-1 लाख रुपये का 5 साल के लिए निवेश करते हैं। राम 30 फीसदी, मोहन 20 फीसदी और श्याम 10 फीसदी टैक्स स्लैब के अंतर्गत है। परिपक्वता पर तीनों को 9 फीसदी के कंपाउंड ब्याज के साथ 1,56,822 रुपये प्राप्त होते हैं। इस तरह तीनों निवेशकों को 56,822 रुपये की आमदनी होती है।
ऐसे में राम को एफडी की आय पर 17,047 रुपये, डेट फंड पर 5,682 और एमआईपी पर 5,682 रुपये कर देना होगा। बैलेंस्ड फंड करमुक्त होगा। मोहन को एफडी पर 11,364, डेट फंड पर 5,682 और एमआईपी पर 5,682 रुपये कर देना होगा। बैलेंस्ड फंड पर कोई कर नहीं देना होगा। वहीं, श्याम को एफडी या डेट फंड या एमआईपी तीनों से हुई आय पर 5,682 रुपये की कर देयता बनेगी, जबकि बैलेंस्ड फंड से हु़ई आय करमुक्त होगी।
(इस उदाहरण में डेट और एमआईपी उत्पाद में अधिकतम कर देयता की गणना की गई है।)