बीमा कंपनियों के ढीले रवैये से अनक्लेम राशि की मात्रा में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। जिसका सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर हो रहा है, जिनके परिजनों ने अपना बीमा परिवार की सुरक्षा के लिए कराया था।
दुर्भाग्यवश बीमाधारक की मौत के बाद भी उसके परिवार को बीमा कंपनियों से क्लेम नहीं मिल सका और क्लेम की राशि अनक्लेम राशि के रुप में पड़ी है। अब ऐसी पड़ी राशि को बीमा कंपनियों से लेना आसान हो सकेगा। इरडा ने इसके लिए बीमा कंपनियों के नियमों को सख्त कर दिया है।
बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के अनुसार मार्च 2013 तक अनक्लेम राशि 4,865.31 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इरडा ने कंपनियों को लिखे सर्कुलर में कहा है कि अनक्लेम राशि की मात्रा में जिस तेजी से बढ़ोतरी हुई वह काफी चिंता का विषय है। साल 2007-08 में अनक्लेम राशि केवल 1,372.64 करोड़ रुपये थी। इरडा ने कहा है कि ऐसा क्लेम लेने वालों में जागरूकता की कमी और कंपनियों के तरफ से अभी भी क्लेम निपटारे में पुराने तरीके अपनाने से भी हो रहा है।
इरडा के अनुसार अब सभी कंपनियों की पॉलिसीहोल्डर प्रोटेक्शन कमेटी को हर छह महीने में अनक्लेम राशि की समीक्षा करनी होगी। इसके अलावा बीमाधारक की राशि सेटेलमेंट तिथि के छह महीने के बाद भी यदि क्लेम नहीं की जाती है, तो उसे अपनी वेबसाइट पर बीमाधारक का विवरण जारी करना होगा।
इरडा इसके जरिए बीमाधारक के परिवारों को सूचना मिलना आसान करना चाहता है। इसके अलावा क्लेम मिलने में देरी को रोकने के लिए कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के जरिए भुगतान करने की भी बात इरडा ने की है।