वीना कालरा की जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी। उनकी उम्र 49 बरस है और वह पिछले 18 सालों से एक निजी स्कूल में वरिष्ठ प्रशासक के रूप में काम कर रही हैं। उनके बेटे हर्ष ने 2016 में एमसीए करने के बाद नौकरी शुरू कर दी थी। मगर देश की शीर्ष तीन आईटी कंपनियों में शामिल उसकी कंपनी ने मौजूदा संकट में उसके वेतन में कटौती कर दी है और उसे सिर्फ बेसिक वेतन ही मिल रहा है।
उसे पता है कि अगले कदम के रूप में उसे नौकरी से निकाला भी जा सकता है। वीना के पति की सड़क हादसे में मौत हो गई थी और वह तब 23 वर्ष की थीं और उनका बेटा दो साल का। तबसे वह एकल मां के रूप में बेटे की परवरिश करती आई हैं। बेटे की एमसीए की पढ़ाई के लिए उन्होंने पांच लाख रुपये एजुकेशन लोन लिया था।
एजुकेशन लोन बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं के लिए पिछले कुछ वर्षों से प्राथमिकता सूची में रहा है। शिक्षा के क्षेत्र के अपने सपनों को पूरा करने के लिए कर्ज लेने को बुरा भी नहीं माना जाता। एजुशन लोन के कई लाभ हैं, जिनमें परिवार और अभिभावकों के वित्तीय भार को कम करना शामिल है।
यह विद्यार्थियों में बचत की आदत भी डालता है, जिन्हें आगे चलकर काम करते हुए इसका भुगतान करना होता है। उन्हें कर्ज के भुगतान के लिए कोर्स पूरा करने के बाद 12 महीने की छूट या मोरेटोरियम भी मिलता है। कुछ कर्जदाता नौकरी मिलने के छह महीने बाद तक की छूट भी देते हैं। इसके अलावा आयकर अधिनियम की धारा 80 ई के तहत कर में छूट भी मिलती है।
कर्ज भुगतान में मुश्किल
व्यापक रूप में एजुकेशन लोन की तीन श्रेणियां हैं। पहली है, चार लाख रुपये तक का कर्ज, उसके बाद चार लाख से लेकर 7.5 लाख रुपये का कर्ज और फिर 7.5 लाख रुपये से अधिक का कर्ज। चार लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन के लिए कोई समानांतार सिक्युरिटी या गारंटी की जरूरत नहीं होती।
चार लाख से साढ़े सात लाख रुपये के एजुकेशन लोन के लिए कर्जदार को उपयुक्त थर्ड पार्टी गारंटी देनी होती है। साढ़े सात लाख रुपये से अधिक के एजुकेशन लोन के लिए कर्जदार को कर्ज के बराबर मूल्य की संपत्ति गारंटी के बतौर देनी होती है। लोन का भुगतान न करने से संबंधित सभी मामलों में ऋणदाता रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर सकता है और यदि आप उसके आग्रह का सम्मान नहीं करते, तो संबंधित बैंक आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर सकता है।
ध्यान रहे, एक बार आप डिफाल्टर हो जाते हैं तो इसका असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ेगा और आपको डिफाल्टर के रूप में काली सूची में डाल दिया जाएगा। साढ़े सात लाख रुपये से अधिक के लोन के मामले में यदि कर्ज का भुगतान नहीं किया गया, तो ऋणदाता कानूनी रूप से लोन के साथ बतौर गारंटी दी गई संपत्ति को बेचकर लोन की भरपाई कर सकता है।
हर्ष ने एमसीए की पढ़ाई के लिए पांच लाख रुपये लोन लिए थे। इसके लिए उनकी मां वीना को गैरेंटर थीं, लिहाजा उनके बेटे के लोन के बकाए के निपटारे के लिए उन्हें बैंक ने बुलवाया। उन्हें बेटे के कर्ज के बकाए के भुगतान के लिए तैयार रहना चाहिए था।
वह इसे लेकर परेशान जरूर हैं, मगर वह इसका भुगतान या तो अपनी बचतों को तोड़कर या फिर पर्सनल लोन लेकर कर सकती हैं। वास्तव में सबक यह है कि कर्जदार को लोन लेते समय भुगतान करने की अपनी क्षमता को जरूर ध्यान में रखना चाहिए।
यदि आप लोन के भुगतान को लेकर परेशानी का सामना कर रहे हों, तो ध्यान रहे बैंक बहुत उदार नहीं होते। फिर भी आपको कर्जदाता से बात करनी चाहिए, वह कर्ज को पुनर्गठित करने या फिर कुछ सीमित अवधि की छूट प्रदान करने के लिए राजी हो सकते हैं, इससे आपको मुश्किल समय से निकलने में मदद मिल सकती है।