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चिंता मनी-47 : आवासीय संपत्ति के बदले कर्ज मिल सकता है?

Tue, 06 Oct 2020 01:46 AM IST
योगेश साहू नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
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होम लोन - फोटो : iStock
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पचपन साल के देवदत्त सक्सेना अपनी नौकरी के आखिरी दौर में हैं। पिछले बीस साल से वह एक निजी कंपनी में काम कर रहे हैं और फिलहाल चीफ क्वालिटी ऑफिसर हैं। अपने रिटायरमेंट को देखते हुए उन्होंने आखिरी पांच साल में बचत करने की योजना बनाई थी। लेकिन वर्ष 2018 में बेटी की शादी में हुए खर्च से बचत करने की उनकी योजना पर भी असर पड़ा।

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पिछले छह महीने उनके लिए बड़े कठिन रहे हैं, क्योंकि उनका छोटा बेटा भी लखनऊ के उनके घर में उनके साथ रहने लगा है। जिस सॉफ्टवेयर कंपनी में वह काम करता था, उसने उसे बाहर कर दिया है। सक्सेना साहब की वित्तीय हालत बहुत खराब हो गई है, इसीलिए वह जानना चाहते हैं कि घर के एवज में क्या वह कर्ज ले सकते हैं।

संपत्ति के एवज में कर्ज
लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (एलएपी) एक सुरक्षित कर्ज है, जिसे कोई भी अपनी वाणिज्यिक या आवासीय संपत्ति को कर्ज देने वाले के पास गिरवी रख सकता है। यह कर्ज लेते हुए कोई खास कारण दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह कर्ज बच्चों की शिक्षा या शादी या कठिन आर्थिक परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए लिया जा सकता है।
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इस घर के मौजूदा बाजार दर के अनुरूप देवदत्त सक्सेना इसकी कीमत के 75 से 90 प्रतिशत तक कर्ज ले सकते हैं। यह कर्ज कर्जदाता की सुविधा के अनुसार, 15 से 20 साल में चुकाया जा सकता है। यह कर्ज बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा दिया जाता है। यह कर्ज हासिल करने का तरीका भी आसान है।

आपको सिर्फ अपनी आय के स्रोत से जुड़े दस्तावेज बैंक को सौंपने होंगे, ताकि यह पता चल सके कि आप कर्ज चुका सकते हैं। आवेदनकर्ता इसके साथ अपनी दूसरी संपत्ति, जैसे-सेक्युरिटीज में निवेश, बैंक डिपॉजिट या सोने में निवेश आदि से जुड़े दस्तावेज भी दे सकता है, जिससे कर्ज चुकाने की उनकी क्षमता के प्रति निश्चिंत हुआ जा सके। जिस घर के एवज में कर्ज लिया जा रहा हो, वह घर, अपार्टमेंट, व्यावसायिक संपत्ति यानी दुकान, बिल्डिंग या ऑफिस कुछ भी हो सकता है। जमीन के एवज में भी बैंक से कर्ज लिया जा सकता है।

कर्ज लेने की प्रक्रिया
किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान से आप यह कर्ज ले सकते हैं। इसके लिए वहां जाकर आपको एक फॉर्म भरना होगा और अपने घर के स्वामित्व से संबधित तमाम दस्तावेज पेश करने होंगे। आपको अपनी संपत्ति के मूल्यांकन के लिए शुल्क भी अदा करना होगा, ताकि बाजार दर के अनुसार उसका मूल्य तय किया जा सके। इस तरह के कर्ज की मंजूरी मिलने में एक सप्ताह से भी कम समय लगता है, फिर पैसा आपके खाते में पहुंच जाता है।

कर्ज की मंजूरी मिलने के बाद मासिक किस्त और कर्ज चुकाने की अवधि तय होती है। दूसरे कर्ज की तरह संपत्ति पर लिए जाने वाले कर्ज की भी मामूली लागत ली जाती है या कई बार नहीं ली जाती। इसलिए कर्ज की किस्त पूरे जीवन चुकाते रहने के बजाय आर्थिक स्थिति सुधरने की स्थिति में उसे पहले ही चुका देना उचित है। कुछ कर्जदार कर्ज चुकाने की अवधि में घर को आग या दूसरी विपत्ति से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए बीमा पर जोर देते हैं।

सुझाव
देवदत्त सक्सेना को चाहिए कि वह कर्ज लेने से पहले इसे चुकाने के बारे में सोचें। संपत्ति के एवज में कर्ज लेने के बजाय वह रिवर्स मॉर्टगेज के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। इस विकल्प के तहत आपको हर महीने एक निश्चित आय मिलती रहती है, जिसे चुकाने के बारे में बहुत चिंतित होने की जरूरत नहीं है। लेकिन इसमें जोखिम यह है कि तय अवधि में पूरा कर्ज न चुका पाने की स्थिति में घर से हाथ धोना पड़ता है। ऐसे में, देवदत्त सक्सेना अपना घर बेचकर कोई सस्ता मकान खरीद सकते हैं। इससे उनके रिटायरमेंट के फंड की व्यवस्था हो सकेगी।

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