अगर आप एसआईपी रोककर अपना निवेश बंद कर देते हैं, तो इसका अर्थ है, कि आपने शेयर बाजार से लाभ कमाने का अवसर गंवा दिया है। अलग-अलग समय पर निवेश करने पर कैसा रिटर्न मिलता है, यह समझने के लिए हम 10 साल की तान अवधि, 2000-2009, 2005-2014 और 2010-2019 को लेते हैं। इन निवेशों को परखने के लिए हर मामले में प्रत्येक महीने के अंत में बीएसई इंडेक्स में सूचीबद्ध एस एंड पी में एसआईपी में 1,000 रुपये का निवेश किया गया। जिन निवेशकों ने 10 साल या 20 साल का निवेश किया (जैसे कि ए बी सी डी), उस पर मुद्रास्फीति या 2008 की वैश्विक मंदी का कोई असर नहीं था।
अगर पैसे के अभाव में आप भविष्य के लिए निवेश नहीं कर सकते, तो एसआईपी पॉज (दो-तीन महीने के लिए निवेश रोक देना) का विकल्प आजमा सकते हैं या एसआईपी में निवेश तब तक रोक सकते हैं, जब तक कि आप की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं हो जाती। अगर फंड का प्रदर्शन इसके बेंचमार्क (मानक) और पीयर्स (दूसरे फंड) की तुलना में लगातार खराब है, तो आपको दूसरे फंड में निवेश करने के बारे में सोचना चाहिए। आपके पास कम रुपये, तो एसआईपी में कम रुपए डालें, पर एसआईपी को अचानक से न रोकें।
बाजार के नीचे गिरने से चिंतित निवेशक को जल्दी ही अपने निवेश से बाहर निकलने से नुकसान हुआ। निवेशक ई अगर और पांच महीने निवेश करते, तो उन्हें ज्यादा लाभ मिलता।
| अवसर खोना |
निवेशक ई |
निवेशक ई - 1 |
| निवेश अवधि |
जनवरी 2005 - जुलाई 2008 |
जनवरी 2005 - दिसंबर 2009 |
| एसआईपी |
43,000 |
60,000 |
| एसआईपी की वैल्यू |
55,750 |
91,786 |
| रिटर्न(आंतरिक प्रतिफल दर फीसदी) |
16.32 फीसदी |
18 फीसदी |
कोरोना सिर्फ सेहत का संकट ही बनकर नहीं आया है। इसने सभी को आर्थिक संकट में भी डाल दिया है। इस वक्त बचत, निवेश, कर्ज और भविष्य की योजना जरूरी है।
-नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार