कोरोना वायरस के वक्त में सोना निवेश का एक बहुत अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। अमर उजाला ने अर्थशास्त्री आकाश जिंदल से बात की, जिन्होंने बताया कि आज के समय में बाकी चीजों के मुकाबले जैसे रियल एस्टेट, स्टॉक मार्केट, बैंक डिपॉजिट, कमोडिटी - क्रूड ऑयल या स्टील की तुलना में सोना बहुत अच्छा रिटर्न दे सकता है।
अनुमान यह है कि दिसंबर 2020 तक 10 ग्राम सोना 75,000 से 80,000 रुपये तक पहुंच जाएगा। आइए जानते हैं कि इसका कारण क्या है।
सेफ हैवेन एसेट है सोना
आज कोरोना संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवसथा को ध्वस्त कर दिया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में बर्बादी छाई हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर -3.0 फीसदी होगी। कई देशों में बेरोजगारी बढ़ गई है। अमेरिका जैसे देश में भी कई लोगों की जान गई है। यूरोप का भी कोरोना की वजह से हाल बुरा है। जब भी दुनियाभर की अर्थव्यवस्था संकट में होती है, तो गोल्ड को एक सेफ हैवेन एसेट माना जाता है। यानी पिछले 100 साल के इतिहास बताता है कि जब भी अर्थव्यवस्था पर संकट आता है, मंदी आती हो, तो गोल्ड को उस बुरे वक्त का साथी ना सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में माना जाता है।
आने वाले समय में सोने में बढ़ेगा निवेश
तो कहीं ना कहीं आम निवेशक चाहे भारत में हो या भारत के बाहर, उसका रुझान सोना खरीदने की तरफ ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। अर्थशास्त्री आकाश जिंदल ने बताया कि ये संभावना लगती है कि आम निवेशक दुनियाभर की मंदी को देखते हुए आने वाले समय में सोना ज्यादा खरीद सकते हैं। साथ ही साथ जिस तरह से करेंसी में उतार-चढ़ाव आया है, जिस तरह से रेट कट हुए हैं यानी इंटरस्ट रेट कम हुए हैं, चाहे यूएस फेड रिजर्व या अन्य देशों में देखा जाए, उसके चलते ये भी अनुमाह है कि कई देशों के सरकारें भी आने वाले समय में सोना ज्यादा खरीदेंगी।
ये सब कारक कहीं ना कहीं ये बताते हैं के आने वाले समय में सोना एक अच्छा निवेश का विकल्प साबित हो सकता है। लॉकडाउन अगर पूरी दनिया में मई-जून में खुल भी जाता है, तब भी कारोबार और अर्थव्यवस्था को पटरी में आने के लिए कम से कम छह महीने का समय लगेगा क्योंकि कारोबारी जब एक बार ट्रैक से उतर जाते हैं, तो दोबारा ट्रैक में आने के लिए उन्हें बहुत वक्त लग जाता है।
महंगी हो सकती है गोल्ड की एक्सट्रैकशन
इसका मतलब है कि आने वाला समय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है। आईएमएफ ने बताया कि विश्व की अर्थव्यवस्था में -3.0 फीसदी की वृद्धि हो सकती है। तो ऐसे में सोने में निवेश पूरी दुनिया में बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही साथ सोने की जो मौजूदा खानें हैं, उनके अंदर गोल्ड की एक्सट्रैकशन की क्षमता कम होने की भी उम्मीद है और ये भी संभावना है कि आगे चलकर वहां गोल्ड की एक्सट्रैकशन महंगी होगी।
इसलिए बढ़ेंगे दाम
यानी इन सब कारकों से हमें एक चीज समझ आ रही है कि गोल्ड एक ऐसी चीज है जिसकी मांग दुनियाभर में आने वाले एक साल में बढ़ने की उम्मीद है और सप्लाई कम होने की उम्मीद है। तो जाहिर सी बात है बेसिक अर्थशास्त्रिक इकोनॉमिक बताती है कि जिस चीज की मांग बढ़ने की उम्मीद होती है और सप्लाई कम रहने की संभावनी होती है, वहां रेट बढ़ते हैं।
अच्छा रिटर्न देगा सोना
इसके अलावा भारत की बात करें, तो भारत में सोना कई हजारों सालों से निवेश का एक अच्छा विकल्प माना जाता है। कई मौकों पर सोना खरीदना शगुन माना जाता है। आने वाले समय में सोना एक अच्छी रिटर्न दे सकता है। चाहे आप सोने का सिक्का लें या बिस्कुट लें या ज्वैलरी लें, वो भी आपको अच्छा रिटर्न दे सकता है। जब आप ज्वैलरी लेते हैं, तो उसके लिए मेकिंग चार्ज लगते हैं, ज्वैलरी बेचते समय भी उसमें डिडक्शन होती है। यानी मोटा-मोटा मानते हैं कि ज्वैलरी में सोना खरीदते हैं तो वहां तरह-तरह के चार्जेज या डिडक्शन लग जाती हैं।
पर विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर आप ज्वैलरी शेप में भी सोना खरीदते हैं, तो वो भी अच्छा है क्योंकि एक तरह जब हम उम्मीद कर रहे हैं कि सोने के दाम इतने बढ़ जाएंगे तो जाहिर सी बात है कि ज्वैलरी परिवार की महिलाओं को खुशी भी देगा। आपके सोशल स्टेटस यानी समाजिक रुतबे को भी बढ़ाएगा और अच्छा निवेश का विकल्प तो साबित होगा ही होगा।
डेढ़ से दो दाल की अवधि के लिए सोना खरीदना एक बहुत अच्छा विकल्प हो सकता है और हमारे समाजिक मान्यताओं के हिसाब से चलें, तो सोना खरीदना वैसे भी अच्छा है। आज सोना अगर खरीदते हैं, तो आने वाले समय में, बच्चों की शादी के समय में अगर रेट और बढ़ जाता है, उससे आप और सोना बनवा सकते हैं। लोगों को इस समय कुछ निवेश सोने में करना चाहिए, चाहे सोने का सिक्का खरीदें या बिस्कुट।