आने वाले दिनों में बीमा, पेंशन, भविष्य निधि जैसे निवेश विकल्पों के नियम आसान हो सकते हैं। सरकार इन कदमों के जरिए इन क्षेत्रों में लंबी अवधि के निवेशकों को आकर्षित करना चाहती है।
सरकार की कोशिश है कि घरेलू कॉरपोरेट बांड मार्केट इस तरह विकसित हो कि कॉरपोरेट और छोटे कारोबारी पूंजी जुटाने के लिए केवल बैंकिंग प्रणाली पर निर्भर रहे। कॉरपोरेट बॉड मार्केट को आकर्षक बनाने के लिए आर्थिक समीक्षा 2013 में सरकार ने कवर्ड बांड, म्यूनिसिपल बांड, क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप, सिक्योरिटाइजेशन रिसिप्ट जैसे उत्पादों को प्रोत्साहित करने की भी बात कही है।
समीक्षा के अनुसार, इन कदमों से जहां उद्योग जगत के लिए पूंजी जुटाना आसान होगा, वहीं उसकी लागत भी कम होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, जहां लंबी अवधि के पूंजी की जरूरत होती है, के लिए विकसित बांड मार्केट काफी सहायक हो सकता है।
समीक्षा में बैंकों की जमाओं की ग्रोथ में गिरावट के साथ-साथ कर्ज की रफ्तार में आई कमी पर भी चिंता जताई गई है। हालांकि , सरकार खास तौर से सार्वजनिक बैंकों की बढ़ती गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) को अभी खतरे की घंटी नहीं मान रही है। उसके अनुसार सार्वजनिक बैंकों का एनपीए अभी भी नियंत्रित है।
समीक्षा के अनुसार, साल 2010-11 में बैंकों की जमाओं की ग्रोथ 15.69 फीसदी थी, 2011-12 में वह बढ़कर 16.51 फीसदी और 2012-13 की तीसरी तिमाही में कम होकर 12.87 फीसदी रह गई है। इसी तरह बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज की ग्रोथ दर भी 2011-12 के 18.71 फीसदी से कम होकर 2012-13 की तीसरी तिमाही तक 15.18 फीसदी पर आ गई है।
बैंकिंग सेक्टर का एनपीए मार्च 2011 के 2.36 फीसदी से बढ़कर सितंबर 2012 तक 3.57 फीसदी पर पहुंच गया है। इसकी प्रमुख वजह टेक्सटाइल, रसायन, आयरन और स्टील, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण और टेलीकम्यूनिकेशन क्षेत्र में कारोबार का मंदा होना रहा है।
आर्थिक समीक्षा में न्यू पेंशन प्रणाली को उम्मीद के मुताबिक सफल न रहने की बात की गई है। उसके अनुसार न्यू पेंशन प्रणाली के बारे में जानकारी न होने और लोगों तक उसकी पहुंच कम होने की वजह से यह उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पाई है।
समीक्षा में वित्तीय समावेशन के लिए चलाई जा रही स्वावलंबन योजना की चुनौतियों के बारे में कहा गया है कि शिक्षा की कमी, बचत कम हो पाना, कई राज्यों और केंद्र शासित राज्यों का उम्मीद के मुताबिक सहयोग न मिल पाना प्रमुख कारण रहा है।
इसी तरह, बीमा क्षेत्र के विस्तार के लिए समीक्षा में उत्पादों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनको सरल और कम लागत वाले बनाने की भी बात कही गई है। इसके अलावा, वित्तीय उत्पादों के रिटर्न को भी महंगाई दर से ज्यादा रहने पर ही आकर्षक बनाया जा सकता है। समीक्षा के अनुसार ऐसा होने पर ही लोग सोना और रीयल्टी में निवेश से दूर होंगे।