फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सस्ते शेयरों और रक्षात्मक थीम वाले सेक्टरों में करें निवेश

Mon, 04 Jun 2018 12:05 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन

भारतीय शेयर बाजार उस चरण में है, जहां न तो कोई लगातार निवेश कर सकता है और न ही अत्यधिक सावधानी बरतते हुए निवेश से दूरी बनाकर रख सकता है। क्रिकेट की परिभाषा में कहें तो बाजार इस समय मध्य ओवर में है, जहां खिलाड़ी को एक समेकित पारी खेलनी होती है और साथ ही रन भी जुटाना होता है। यानी, कुल मिलाकर बाजार एक रक्षात्मक जोन में है, जहां निवेशकों को कम मूल्य वाले सेक्टर या रक्षात्मक थीम पर फोकस करना चाहिए।

विज्ञापन


महंगा मूल्यांकन
बाजार इन दिनों मध्य ओवर में है। इसका यह कारण है कि पहले तो शेयर काफी महंगे स्तर पर हैं। प्राइस अर्निंग अनुपात 20 गुना है जो औसत मूल्यांकन के 17 के स्तर से ज्यादा है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आधार पर बाजार पूंजीकरण के लिहाज से अभी सस्ता नहीं है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में प्राइस टू अर्निंग 40 के करीब है। अधिकतर स्टॉक महंगे स्तर की ओर हैं। मिडकैप और स्मॉलकैप पिछले कुछ सालों से तेजी से बढ़े हैं क्योंकि इनका मूल्यांकन कम रहा है और अच्छी तरलता रही है। परिणामस्वरूप इन स्टॉकों ने व्यापक बाजार को पीछे छोड़ दिया है और अब भी ये महंगे मूल्यांकन पर एक संतुलित दायरे में हैं।

विज्ञापन

सीमित दायरे में मिलेगा रिटर्न

जब स्टॉक महंगा होता है तो भविष्य में रिटर्न मिलना आसान नहीं होता है। हालांकि हम किसी बुलबुले के दौर में नहीं हैं। हकीकत में आनेवाले सालों में कारपोरेट आय में सुधार होगा, क्योंकि क्षमता मांग की स्थितियों में सुधार दिख रहा है और इन्फ्रा क्षेत्र में निवेश की गति भी तेज हो रही है। इसलिए निवेशकों की दिलचस्पी आनेवाले सालों में इन शेयरों में बनी रहेगी। खासकर उन सेक्टरों में, जहां आय में वृद्धि गति पकड़ेगी, लेकिन निवेशकों को रिटर्न एक सीमित दायरे में मिल सकता है।
 

लंबी अवधि का हो नजरिया

आने वाली तिमाहियों में बाजार से एक सामान्य रिटर्न की अपेक्षा करनी चाहिए। यह वह समय है, जहां बाजार में ज्यादा रक्षात्मक नजरिया अपनाना चाहिए। निवेशकों को एक मिला जुला निवेश करना चाहिए। कम मूल्य वाले और कम महंगे सेक्टर हों और लंबी अवधि का नजरिया हो, तो यह मदद कर सकता है।

मौजूदा बाजार में निवेशक ऑयल एवं गैस, युटिलिटी, इन्फ्रा, चुनिंदा वित्तीय कंपनियों आदि में निवेश कर सकते हैं, खासकर लार्जकैप शेयरों में, जहां मूल्यांकन अभी भी संतुलित दायरे में है। हमने पिछली तिमाही में टेक्नोलॉजी और फार्मा कंपनियों में थोड़ा सुधार देखा है। कई सरकारी शेयर भी ऊंचे मूल्यांकन पर हैं, फिर भी इनमें निवेश के लिए संभावना है।

 

तेल कीमतें बन सकती हैं बाधा

तेलों की कीमतें हाल में 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, हालांकि अभी इसमें थोड़ी नरमी है। ऐसी स्थिति में चालू खाते का घाटा (सीएडी) पर असर पड़ सकता है। यह घरेलू ब्याज दरों पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। पहले से ही 10 साल की सरकारी प्रतिभूतियां अपने उच्च स्तर को पार कर चुकी हैं और अब यह 7.81 फीसदी के आस-पास है। फिक्स्ड इनकम उस समय सस्ते हो जाते हैं, जब तेल की कीमतें ऊपर होती हैं। हालांकि अगर तेल की कीमतें कम होती हैं तो फिक्स्ड इनकम फंड्स अच्छा रक्षात्मक असेट क्लास हो सकते हैं और इससे 8.9 फीसदी का रिटर्न मिल सकता है।
 
विज्ञापन

निवेश के अवसर

भारत उन कुछ देशों में से है, जहां कारपोरेट आय अभी भी गति नहीं पकड़ी है। जल्दी या देर से ही सही, आय के चक्र में तेजी दिख सकती है और इसका सकारात्मक असर बाजार पर दिखेगा। निवेशकों को अभी भी सावधानी के साथ निवेश करना चाहिए। कोई भी घरेलू या वैश्विक स्तर की नकारात्मक खबरें बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।

इक्विटी से मध्यावधि में ऊंचे रिटर्न की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। इसलिए निवेशकों को रक्षात्मक और कम मूल्य वाले स्टॉकों, लार्जकैप फंड में लंबी अवधि की एसआईपी, डेट अक्रुअल फंड्स और बैलेंस्ड फंड्स में निवेश करना चाहिए, जो वर्तमान स्थिति के हिसाब से निवेश के लिए अच्छे अवसर हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें