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कैसे बचाएं लैप्स होने से अपनी इंश्यारेंस पॉलिसी?

Mon, 18 Nov 2013 01:10 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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अभिषेक मिश्रा ने एक प्रश्न पूछा है कि मैंने एक मनीबैक पॉलिसी ली है, जिसमें मुझे हर 4 साल पर मनीबैक की रकम मिलनी है। मैंने पॉलिसी के अब तक 4 सालाना प्रीमियम जमा किए हैं। आगे चल कर मैं अगर प्रीमियम का भुगतान नहीं कर पाता हूं, तो क्या मुझे मनीबैक के रूप में और पॉलिसी की मेच्योरिटी पर कोई रकम मिलेगी।
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जवाब-आपने अपनी बीमा पॉलिसी का नाम नहीं बताया है। इसलिए आपके मामले में पूरी तरह सटीक जानकारी दे पाना मुश्किल है। सामान्यत: ग्रेस पीरियड, जोकि प्राय: 30 दिन का होता है, के भीतर प्रीमियम जमा न करने पर पॉलिसी लैप्स हो जाती है। ऐसे में यह पॉलिसी के नियम व शर्तों पर निर्भर करता है कि आप पॉलिसी सेरेंडर करने पर किसी सेरेंडर वैल्यू के हकदार होंगे या नहीं। पॉलिसी को एक निश्चित अवधि के भीतर दोबारा चालू (रिवाइव) करवाया जा सकता है। यह अवधि सामान्यत: दो से पांच वर्ष की होती है। हालांकि इसके लिए आपको सारे बकाया प्रीमियम का भुगतान पेनाल्टी या शुल्क समेत करना पड़ेगा। इसके अलावा बकाया प्रीमियम के लिए आपको ब्याज का भुगतान भी करना पड़ सकता है, जोकि 12 फीसदी तक हो सकता है।

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शकील ने जनाना चाहा है कि मेरे पिताजी ने 1993 में एलआईसी की 50 हजार रुपये की एक पॉलिसी खरीदी थी। उन्होंने दो साल तक ही उसका सालाना प्रीमियम जमा किया था। उसके बाद प्रीमियम का भुगतान नहीं किया गया। अब मैंने अपनी एक नई एलआईसी पॉसिली ली है। मैं चाहता हूं कि मेरे पिता द्वारा जमा की गई राशि मेरी पॉलिसी में ट्रांसफर कर दी जाए या उस पॉलिसी को मेरे नाम ट्रांसफर कर दिया जाए। क्या ऐसा संभव है?
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उत्तर-आपने पॉलिसी का नाम नहीं बताया है। इसलिए पक्के तौर पर इस बारे में कुछ बता पाना मुश्किल है। हमारी समझ में आपके पिताजी की पॉलिसी प्रीमियम अदा न किए जाने के चलते लैप्स हो चुकी है। जहां तक पॉलिसी आपके नाम ट्रांसफर किए जाने का सवाल है, तो ऐसा नहीं होता है। लैप्स पॉलिसी को केवल 2 से 5 साल के भीतर ही रिवाइव किया जा सकता है। इसलिए आपके पास विकल्प यही है कि आप लैप्स हुई पॉलिसी को सेरेंडर कर सेरेंडर वैल्यू हासिल कर सकते हैं।

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डिस्क्लोजर

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों से लेकर शेयर बाजार और तमाम नीति-नियमों में डिस्क्लोजर शब्द का इस्तेमाल होता है। साधारण अर्थों में डिस्क्लोजर का मतलब खुलासा करना होता है। इस शब्द का पूंजी बाजार में काफी महत्व है।

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निवेशकों को कंपनी तथा उसके मीडिएटर के बारे में आवश्यक जानकारियां समय-समय पर मिलती रहे, इसके लिए सेबी समय-समय पर डिस्क्लोजर के नियम बनाती एवं संशोधित करती रहती है। इसके आधार पर ही निवेश का निर्णय लिया जाता है। निवेश करने का निर्णय लेने में यह जानकारियां काफी मायने रखती हैं।

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निर्मल रेवारिया
सीनियर वीपी एंड हेड एडलवाइस फाइनेंस प्लानिंग
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