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नए साल में स्टॉक मार्केट के बजाए म्युचुअल फंड में निवेश करना फायदेमंद, बाजार में रहेगी उठापटक

Mon, 01 Jan 2018 11:08 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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धन निवेश
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इसमें कोई शक नहीं कि बाजार ने बीते साल काफी तेजी दिखाई है, लेकिन कारपोरेट आय में अब भी निश्चितता आनी बाकी है। ऐसी परिस्थिति में हमें लगता है कि बाजार का रिटर्न अब समापन की ओर है और इसी वजह से हमने निवेशकों को सचेत भी कर दिया है।

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एक साल के दृष्टिकोण से देखें, तो डेट आकर्षक अवसर बना रहेगा, लेकिन तीन साल के दृष्टिकोण से देखें, तो डेट के रिटर्न की उम्मीद एसेट क्लास की तुलना में थोड़ी कम ही दिखाई पड़ती है।

आपको नए साल के निवेश के लिए ऐसी योजना बनानी होगी, जो बाजार के उतार-चढ़ाव के माहौल में जोखिम से बचा सके, साथ ही आपके निवेश में वृद्धि कर सके। ऐसे माहौल में निवेशक बैलेंस एडवांटेज फंड को अपना सकते हैं, जो डेट और इक्विटी का मिला-जुला उत्पाद है।
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म्यूचुअल फंड का एयूएम 21 लाख करोड़ पार 
म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए साल 2017 एक यादगार साल रहा है। इस दौरान बाजार में न सिर्फ  लगातार तेजी देखी गई, बल्कि बाकी सालों से अलग हटकर इस साल रिटेल निवेशकों ने भी इस तेजी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस उद्योग का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम (संपत्ति प्रबंधन) 21 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया, जबकि 18 महीने पहले यह काफी कम था। यह उस दौरान हुआ, जब बाजार नोटबंदी और जीएसटी के मद्देनजर थोड़ी-बहुत अनिश्चतता के दौर से गुजर रहा था। 

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तय करें निवेश व उम्मीदों की सीमा 

गौर करें तो बाजार जरूर ऊपर चढ़ा है, लेकिन यह भी सच है कि साल 2018 के लिए निवेश से संबंधित फैसले पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। एक ओर बाजार जहां कुलांचे मारते हुए आगे बढ़ रहा था, ऐसे में हाशिये पर गए निवेशकों ने मौके को भांपा और इक्विटी, बैलेंस्ड स्कीम में निवेश कर म्यूचुअल फंड के रास्ते अपनी जगह बना ली।

नए साल में जैसे-जैसे ज्यादा निवेशक बाजार में प्रवेश करते रहेंगे, खासकर पहली बार इक्विटी में निवेश करने वाले निवेशक, तो उनके लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि वे अपने निवेश और उम्मीदों की सीमा तय करें।

मध्यम चक्र में इक्विटी बाजार
भारतीय इक्विटी बाजार इस समय मध्यम चक्र में है और यही वह समय है जब क्षमताओं का दोहन, कारपोरेट लाभप्रदता, क्षमता का विस्तार और क्रेडिट ग्रोथ पर नजर बनाई जाए। क्षमताओं का दोहन अभी 70 फीसदी पर है, जो 2007 की तेजी में 92 फीसदी से काफी नीचे है।

यही बात कारपोरेट की लाभप्रदता पर भी लागू होती है, जो पिछले चार सालों से काफी पिछड़ रहा है। क्षमता का विस्तार और क्रेडिट ग्रोथ ऐसे दो कारक हैं, जो अगर अपने आप में सुधार लाए तो अर्थव्यवस्था की सुस्त पड़ी रफ्तार को तेज किया जा सकता है। फिलहाल तो यही उम्मीद की जा रही है कि बाजार में तेजी आ चुकी है। आगे चलकर बढ़ती हुई आय बाजार को तेज तो रखेगा, परंतु उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी।

बैलेंस्ड योजनाएं आएंगी
यही वक्त है, जब बैलेंस्ड एडवांटेज कैटेगरी वाली योजनाएं सामने आती हैं। इस स्कीम में निवेश फंड को इक्विटी और डेट सभी एसेट क्लास में बांटकर किया जाता है और यह इस पर भी निर्भर करता है कि किसी एसेट क्लास की सापेक्षिक आकर्षकता क्या है? मौजूदा बाजार की परिस्थिति में इस तरह के किसी भी निवेश का मतलब सबसे अच्छा प्रदर्शन करनेवाली परिसंपत्ति के क्लास (इक्विटी) में पोजिशन को घटाकर किसी दूसरे एसेट क्लास में बढ़ाना है। इसमें स्वयं पुनर्संतुलन (ऑटो रीबैलेंसिंग) सुनिश्चित करता है कि सभी प्रकार की भावनाओं को एक ओर कर सस्ते पर खरीदो और महंगे स्तर पर बेचो जैसी नीति का अनुसरण किया जाए।

बाजार में रहेगी उठा-पटक
चूंकि पिछले दो सालों में भारतीय इक्विटी बाजार काफी तेजी दिखा चुका है और इनका मूल्यांकन भी काफी हद तक खिंचा जा चुका है, इसलिए इसकी संभावना काफी ज्यादा है कि बाजार में थोड़ा उठा-पटक देखने को मिले। ऐसे अवसरों पर डेट की उपस्थिति उतार-चढ़ाव के दौरान झटका सहन करने की शक्ति प्रदान करेगी।

निमेश शाह, एमडी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, एएमसी  
 
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