अगर आपके पास भी पुराने 500-1000 रुपये के नोट पड़े हुए हैं तो केंद्र सरकार के इस कदम से आपको निराशा हाथ लगेगी। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में यह जवाब दाखिल करने की तैयारी मे हैं कि अगर पुराने नोट जमा करने के लिए फिर से अनुमति दी गई तो इससे नोटबंदी करने की मुहिम को धक्का देगा।
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, सरकार का फिर से पुराने नोट जमा करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। अगर ऐसा किया गया तो फिर लोग इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार इस बात को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेगा, इसके बाद कोर्ट जैसा आदेश देगा फिर उसी का पालन किया जाएगा।
नेपाल, भूटान से देश में आ सकते हैं पुराने नोट
सरकार का तर्क है कि दुबारा यह सुविधा शुरू करने से देश से बाहर जा चुके पुराने नोट भी नेपाल, भूटान के रास्ते वापस आ सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों से भारत की सीमाएं खुली हुई हैं। ऐसे में यहां से आने वाले पुराने नोटों को ट्रैक नहीं किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि नोटबंदी से आतंकवाद और नक्सलियों की कमर तोड़ दी थी। पुराने नोट को वापस लेने से आतंकवादी और नक्सली भी अपने पास जमा पुराने नोट वापस कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो नए नोट इनके पास आ जाएंगे, जिससे यह फिर से कोई बड़ा हमला कर सकेंगे।
सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वमान्य है और हम कोर्ट के फैसले की इज्जत भी करते हैं। लेकिन कोर्ट को भी सरकार अपने इस रुख से अवगत कराएगी। सरकार का मानना है कि नोटबंदी के बाद लोगों को काफी समय दिया गया था कि वो पुराने नोटों को जमा करा सकें।
अगर उस समय भी लोग अपने पुराने नोट जमा नहीं कर पाए तो फिर इसमें उनकी क्या गलती है। अगर फिर से छूट दी गई तो क्लीन हुए सिस्टम को गंदा होने में देर नहीं लगेगी।