सभी निवेश निवेशकों की भावनाओं, दृष्टिकोण और लक्ष्यों के मुताबिक होता है। प्रत्येक निवेशक की अलग लक्ष्य होते हैं ऐसे में वो उसी लिहाज़ से जोखिम को देखते हुए निवेश करते है। कई बार देखा गया है कि निवेश में ज्यादा फायदा नहीं रहा लेकिन लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट की बात करें तो यहां बेहतर नतीजे देखे गए हैं। रिलायंस ग्रोथ फंड-ग्रोथ प्लान और फ्रैंकलिन इंडिया प्राइमा फंड की विकास कहानी हमारे विचारों का समर्थन करने के लिए दो उदाहरण हैं।
अगर बाजार मंदी में होता है तो ऐसी परिस्थितियों में हम आम तौर पर एक विशिष्ट फंड में और अधिक निवेश करने का सुझाव देते हैं क्योंकि यह औसत अवसर प्रदान करता है, जिसके चलते अच्छे रिटर्न की संभावना लंबे वक्त तक रहती है।
विशेष फंड के निधि प्रबंधक और उसकी निवेश शैली में बदलाव, फंड मैनेजर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, उनका प्रदर्शन 'अल्फा' अनुपात द्वारा आंका जाता है। जो एक ग्राहक को फंड चुनने और सलाह देने में प्रमुख मानदंड है। संपत्ति आवंटन का उनका तरीका सबसे महत्वपूर्ण कारक है जिस पर म्यूचुअल फंड अपने रिटर्न प्राप्त करता है। इसलिए उनके फंड मैनेजर का अनुभव और निवेश दोनों म्यूचुअल फंड रिटर्न को चलाने में काफी मायने रखता है।
हालांकि, हम आम तौर पर व्यक्तिगत निधि प्रबंधकों की तुलना में केवल अच्छे और बड़ी एएमसी कपंनियों की सिफारिश करते हैं। इसलिए संबंधित फंड मैनेजर में बदलाव सामान्य रूप से किसी विशेष रूप से एसआईपी निधि को बंद करने के लिए नहीं होना चाहिए।
फंड के उद्देश्य में परिवर्तन को लेकर सलाहकार ग्राहकों को निवेशकों के विशिष्ट लक्ष्यों को ध्यान में रखने की सलाह देते हैं। यदि फंड अपने उद्देश्य को बदलता है, जिसके परिणामस्वरूप रिटर्न में गिरावट आए, तो ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि एसआईपी को दूसरे फंड में स्विच करें जो मानदंड पूरा करता है। और साथ ही निवेशक उद्देश्यों की अनिश्चितता के कारण निवेशक म्यूचुअल फंड में एक संपत्ति वर्ग के रूप में अपना आत्मविश्वास खो देता है।
पुनर्वितरण के साथ एएमसी द्वारा घोषित योजनाओं का विलय होता है, विलय ज्यादातर बड़ी फंड कंपनी और एएमसी के मुख्य निधि के साथ नहीं होते हैं। यह हमेशा छोटी फंड कंपनी के साथ होता है जो हम आम तौर पर हमारे निवेशकों को नहीं करते की सलाह देते हैं। जहां विलय निवेश लक्ष्यों को प्रभावित करता है, तो यह एसआईपी स्विच करने का समय है।
एक निवेश पोर्टफोलियो में परिवर्तन, आदि। एक निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव को गंभीर कदम के रूप में माना जाना चाहिए क्योंकि यह दोनों नकारात्मक या सकारात्मक नतीजे दे सकता है। निवेश शैली को बदलने का कारण की अच्छे से जांच होनी चाहिए, क्योंकि यह बाजार के दिशा-निर्देशों के बारे में अनुमान लगाता है। यह सलाहकार को क्लाइंट की दूसरी समीक्षा में फिर से निवेश करने को मजबूर कर सकता है।