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नए निवेशकों के लिए बिना रिसर्च के शेयर बाजार में निवेश से खतरा, म्यूचुअल फंड है बेहतर विकल्प

Mon, 30 Jul 2018 10:20 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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अगर आप बीमार होते हैं या स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या होती है तो आप क्या करेंगे? इसका आसान उत्तर होगा कि आप डॉक्टर के पास जाकर बीमारी का दवा लेंगे। इसी तरह आयकर से जुड़े मामले के लिए आप बिना हिचक एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से मदद लेंगे।

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अगर आपकी कार खराब हो जाती है और कोई विशेष समस्या है तो आप किसी अच्छे मैकेनिक के पास जाएंगे। उपर्युक्त सभी मामलों में आप ऐसे पेशेवर विशेषज्ञों से सहायता लेना चाहते हैं, जो उस विषय को अच्छी तरह जानता है और आपको उपयुक्त समाधान देने में सक्षम है।

वित्तीय प्रबंधन में ऐसा क्यों नहीं करते

ज्यादातर लोग अपने व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन या निवेश का निर्णय काफी हद तक खुद ही कर लेते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो ज्यादातर निवेशक अपने निवेश का फैसला बिना किसी विशेषज्ञ की मदद से कर लेते हैं। सही निवेश निर्णय लेने के लिए समझदारी के साथ विशेषज्ञता बहुत ही जरूरी है। यह सही जगह एसेट एलोकेशन और सही फंड चुनाव में मदद करता है। निवेश का प्रबंधन करना एक पूर्णकालिक कार्य है।
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छोटे निवेशक म्यूचुअल फंड चुनें

शेयर बाजार में बिना सही तरीके से रिसर्च के पैसा लगाने पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। मैं छोटे निवेशकों को सलाह देना चाहता हूं कि वे सीधे इक्विटी में निवेश के बदले म्यूचुअल फंड में निवेश करें। ऐसा इसलिए कि म्यूचुअल फंड का प्रबंधन बहुत ही अच्छे तरीके से किया जाता है।

फंड मैनेजर शेयरों का विश्लेषण करते हैं। फंड मैनेजरों द्वारा निवेश का फैसला बहुत ही रिसर्च के बाद किया जाता है। जब फंड मैनेजर को लगता है कि कंपनी लंबी अवधि में अच्छे तरीके से प्रदर्शन करेगी और निवेश पर शानदार रिटर्न मिलेगा तभी वो निवेश करने की सलाह देते हैं।

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सीधे निवेश से होता है नुकसान

अनुभव में हमने देखा है कि जो खुदरा निवेशक शेयर बाजार में सीधे निवेश करते हैं नुकसान ही उठाते हैं। आमतौर पर वे अपने पोर्टफोलियो में बहुत अधिक शेयर खरीद लेते हैं। इस चक्कर में यदि उनको कमाई होती भी है, तो वह बाजार के औसत रिटर्न से कम होती है।

ऐसा कंपनी के विषय में सही समझ नहीं होने और शेयरों की अधिक मूल्य पर खरीददारी से होता है। निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसके चलते कई बार निवेश की हुई पूंजी का लौटना भी मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा शेयरों की जल्दी खरीदारी और बिक्री पर निवेशकों को कई अतिरिक्त शुल्क चुकाने होते हैं जैसे ब्रोकरेज शुल्क। इसके चलते कई दफा मिलने वाले रिटर्न के मुकाबले शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगने वाला शुल्क काफी ज्यादा हो जाता है।

म्यूचुअल फंड की ये हैं विशेषताएं

म्यूचुअल फंड के मामले में पहला, फंड मैनेजर सक्रिय आधार पर कम स्टॉक का मालिकाना सुनिश्चित करता है। साथ ही विभिन्न स्टॉक और सेक्टरों में जोखिम को आंकते हुए एक विविध पोर्टफोलियो बनाता है।

दूसरा, फंड मैनेजर कंपनियों के व्यावसायिक मॉडल और मूल्यांकन के बारे में गंभीरता से और लगातार पता करता रहता है। इसके बाद ही वह निर्णय लेता है कि कौन-सी कंपनी में निवेश को बनाए रखना और किस से निकलना है।

तीसरा, म्यूचुअल फंड में कम लागत के साथ बेहतर रिटर्न मिलता है।

चौथा, म्यूचुअल फंड मार्ग के माध्यम से निवेश करने के कुछ अन्य लाभ भी हैं। ये लाभ हैं कर की बचत, कम लागत और पारदर्शी निवेश। सेबी द्वारा इसे विनियमित करने से हमेशा निवेशकों के हितों का खास ख्याल रखा जाता है।

अखिल चतुर्वेदी, कार्यकारी उपाध्यक्ष, हेड, सेल्स एंड डिस्ट्रीब्यूशन, मोतीलाल ओसवाल एएमसी
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