आज के युग में स्वास्थ्य बीमा अथवा हेल्थ कवर लेना अनिवार्य हो गया है। मरीजों की बढ़ती संख्या के हिसाब से सरकारी हेल्थकेयर सिस्टम पर्याप्त नहीं है, जिससे सरकारी अस्पतालों में समय पर अच्छी चिकित्सा का मिल पाना काफी मुश्किल हो गया है। कस्बाई शहरों से लेकर बड़े शहरों में निजी क्षेत्र में अस्पतालों के लगातार नए विकल्प आ रहे हैं, लेकिन सबके यहां इलाज काफी महंगा है। आम मध्यमवर्ग के लिए निजी क्षेत्र के अस्पतालों में चिकित्सा का खर्च उठा पाना आसान नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि स्वास्थ्य का पर्याप्त बीमा हो।
क्यों जरूरी है हेल्थ कवर
बीमारी कभी भी कह कर नहीं आती। जब हम स्वस्थ होते हैं तब हमें इस बात का अहसास ही नहीं रहता कि हम कभी बीमार भी पड़ सकते हैं। जब बीमारी घेरती है अथवा जब किसी दुर्घटना के शिकार होते हैं तब हमारा ज्ञान खुलता है कि हमने समय पर अपना और परिवारजनों का हेल्थ कवर क्यों नहीं लिया। उपयुक्त हेल्थ कवर होने से मन में एक संतोष का भाव होता है कि कभी कुछ होने की स्थिति में कोई आर्थिक रूप से समस्या में नहीं फंसेंगे।
जल्द लेना अधिक अच्छा
जीवन बीमा हो, निवेश हो या हेल्थ कवर, जितनी जल्द ले ली जाए उतना ही अच्छा। जल्द हेल्थ कवर लेने के फायदे ही फायदे हैं। प्रीमियम के हिसाब से देखें तो जितनी कम उम्र उतना ही कम प्रीमियम। सहूलियत के हिसाब से देखें तो कम उम्र में हेल्थ कवर लेने में दिक्कत भी नहीं आती। अधिकांश मामलों में कंपनियां कम उम्र में हेल्थ कवर लेने पर मेडिकल जांच की कोई शर्त नहीं रखतीं। ढेर सारी कंपनियां कई गंभीर बीमारियों को पहले कुछ सालों तक कवर में नहीं रखतीं, ऐसे में अगर युवावस्था में ही हेल्थ कवर लिया गया हो तो आगे जरूरत के वर्षों में इस तरह की उम्रजनित बीमारियों के कवर में दिक्कत नहीं आती।
कैसे चुनें सही बीमा कंपनी
बाजार में स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों की कोई कमी नहीं है। सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनियों से लेकर निजी क्षेत्र में कंपनियां मौजूद हैं। सभी कंपनियों के बीमा उत्पादों की अपनी विशेषताएं हैं। इसमें यह देखना जरूरी है कि इनमें से कौन सा उत्पाद आपकी जरूरतों के हिसाब से मुफीद बैठता है। बीमा कंपनियों से क्लेम के मामले में अपने परिजनों के अनुभव से भी कंपनी चुनने में मदद मिलती है।