मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) के नाम पर फर्जी इनवेस्टमेंट स्कीमें चलाकर लोगों को चूना लगाने वाली कंपनियों पर सरकार शिकंजा कसने जा रही है। कंपनी मामलों का मंत्रालय इसी सप्ताह एक समीक्षा बैठक कर एमएलएम के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों पर नकेल कसने के उपायों पर विचार करेगी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य ऐसी योजनाओं से हटकर निवेशकों को अन्य निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के प्रति प्रोत्साहित करने का भी है। हालांकि इसके लिए कोई नया नियामक निकाय (रेग्यूलेटरी अथॉर्टी) बनाने का सरकार का फिलहाल कोई इरादा नहीं है।
कंपनी मामलों के मंत्री सचिन पायलट ने एक साक्षात्कार में कहा कि कुछ कंपनियां एमएलएम प्लेटफार्म का दुरुपयोग कर रही हैं और हम इसे लेकर काफी चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि मैं इसी सप्ताह इसे लेकर एक बैठक करने जा रहा हूं, जिसमें इस बात पर विचार किया जाएगा इन कंपनियों की धरपकड़ किस तरह की जाए और इनसे कैसे निपटा जाए। गड़बड़ी करने वाली कंपनियों पर राज्य सरकारों के साथ मिल कर केंद्र सख्त कार्रवाई करेगा।
पायलट ने बताया कि मंत्रालय के स्तर पर इस बात पर विचार किया जाएगा कि इस मामले में हमारी स्थिति क्या है और मौजूदा समय में हम कहां खड़े हैं। इसे लेकर हमारे पास कुछ प्रस्ताव और मसौदा भी तैयार है, जिसपर बैठक में गंभीरता से विचार किया जाएगा। हम अवैध ढंग से चलाई जा रही एमएलएम स्कीमों पर शिकंजा कसने के उपायों के साथ-साथ इस बारे में लोगों को जागरूक करने के उपायों पर भी विचार करेंगे क्योंकि यह वास्तव में एक बड़ी समस्या बनती जा रही है।
पायलट ने बताया कि फर्जी मल्टी लेवल मार्केटिंग स्कीमें चलाने को लेकर फिलहाल सरकार 87 कंपनियों पर नजर रखे हुए है। भारी फर्जीवाड़े की आशंका के चलते इनमें से सात कंपनियों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि एमएलएम प्लेटफार्म का दुरुपयोग करने वाली कंपनियों पर काबू के लिए नए नियम और मानदंड तय करने की जरूरत स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है। हालांकि फिलहाल इसके लिए कोई नया नियामक निकाय बनाने की योजना पर विचार नहीं किया जा रहा है। लोगों को ऐसी कंपनियों के झूठे प्रचार और विज्ञापनों के प्रति जागरूक करने की भी सरकार की योजना है।