वाणिज्य कर विभाग में व्यापारियों को वार्षिक रिटर्न न दाखिल करना महंगा पड़ेगा।
विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि वित्तीय वर्ष 2012-13 का वार्षिक रिटर्न 31 दिसंबर तक न दाखिल करने पर व्यापारियों से 10 हजार रुपए तक जुर्माना वसूला जाएगा।
कमिश्नर के इस आदेश से व्यापारियों में हड़कंप है, क्योंकि बड़ी संख्या ऐसे व्यापारियों की है जो कम पढ़े लिखे होने के कारण रिटर्न नहीं दाखिल करते, जिससे कारोबार से आय-व्यय का ब्योरा नहीं मिल पाता।
यह समस्या प्रदेश के तकरीबन हर जिले में है। कमिश्नर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि रिटर्न हर व्यापारी को भरना अनिवार्य है।
नियम के तहत व्यापारियों को साल भर के कारोबार का ब्योरा रिटर्न फॉर्म-26 में भरकर 31 अक्तूबर तक विभाग में जमा कर देना चाहिए। लेकिन बड़ी संख्या ऐसे व्यापारियों की है जिन्होंने रिटर्न फॉर्म नहीं भरा।
दरअसल व्यापारियों में इसे लेकर असमंजस की स्थिति है। जो व्यापारी फॉर्म 26 के जरिए रिटर्न दाखिल कर देते हैं, वह यह मान लेते हैं कि अब उनका स्वत: कर निर्धारण हो जाएगा।
जबकि बड़ी संख्या ऐसे व्यापारियों की है जो रिटर्न दाखिल नहीं करते और यह मानकर चलते हैं कि उनका कर निर्धारण सुनवाई करके हो जाएगा, जबकि एक्ट में साफ है कि सभी व्यापारियों को फॉर्म 26 समय से दाखिल करना है।
31 अक्तूबर तक शत-प्रतिशत रिटर्न फॉर्म न दाखिल होने पर वाणिज्य कर कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण ने इसकी तिथि 90 दिन, यानी 31 दिसंबर तक बढ़ा दी।
उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि फॉर्म-26 हर व्यापारी को भरना अनिवार्य है, नहीं तो अर्थदंड की कार्रवाई होगी।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा ने अर्थदंड की कार्रवाई से बचने के लिए व्यापारियों से निर्धारित तिथि तक फॉर्म-26 दाखिल करने की अपील की है।