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नए साल में छोटी बचत योजनाओं पर घट सकती है ब्याज दर

Fri, 27 Dec 2019 07:34 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

  • आरबीआई ने सरकार से कहा, बाजार के अनुरूप हों जमा दरें
  • 100 आधार अंक ज्यादा ब्याज मिल रही है छोटी बचत पर, वाणिज्यिक बैंकों की तुलना में
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विस्तार
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रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार से लघु बचत योजनाओं के लिए बाजार दरों के अनुरूप ब्याज दर में बदलाव करने के लिए कहा है। यह इस बात का संकेत है कि जनवरी-मार्च तिमाही में जमा दरों में बदलाव देखने को मिल सकता है। आरबीआई की यह पहल इसलिए भी अहम है, क्योंकि वित्त मंत्रालय 31 दिसंबर को जनवरी-मार्च तिमाही के लिए लघु बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों का एलान करेगा। इन्हीं दरों के आधार पर बैंक की जमा दरें तय होती हैं।

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सूत्रों ने कहा, ‘आरबीआई ने आंतरिक रूप से मंत्रालय से रेपो दर में कमी के मद्देनजर छोटी बचत योजनाओं के लिए जमा दरों में बदलाव के लिए कहा है। हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला सरकार को ही लेना होगा।’

छोटी बचत योजनाओं के लिए हर तिमाही में ब्याज दरों में बदलाव किया जाता है और यदि वित्त मंत्रालय मौजूदा दरों में बदलाव नहीं करता है तो दरों में कोई बदलाव नहीं होता है। बैंकों, उद्योग और खाताधारकों की मुख्य रूप से इन लघु बचत योजनाओं पर नजर रहेगी। इन योजनाओं के खाताधारकों में मुख्य रूप से सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी, वंचित तबके के लोग, किसान और महिलाएं शामिल होती हैं।
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इन योजनाओं में डाकघर बचत योजनाएं शामिल होती हैं, जिनमें कई तरह के विश्वसनीय और निवेश पर जोखिम मुक्त रिटर्न देने वाले उत्पाद होते हैं। ऐसी सुरक्षा रिटर्न मुख्य रूप से केंद्र सरकार के बचत पोर्टफोलियो से जुड़ी होती है।

मंत्रालय परोक्ष रूप से इस बात पर जोर देता रहा है कि आरबीआई रेपो दर में कमी का फायदा उपभोक्ताओं को देने के लिए बैंकों पर दबाव बनाए, जिसे देश में खपत में इजाफा हो। बैंक यह कहकर इस बात का विरोध करते रहे हैं कि अगर वे रेपो दर में कमी का 100 फीसदी फायदा उपभोक्ताओं को देंगे तो इससे उनके उनके मार्जिन में कमी आएगी। 

छोटी बचत योजनाओं पर मिल रहा है ज्यादा ब्याज

सूत्रों ने कहा कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें वाणिज्यिक बैंकों की मौजूदा दरों की तुलना में 100 आधार अंक यानी 1 फीसदी ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को भी तय फॉर्मूले के तहत छोटी बचतों पर लागू ब्याज दरों को घटाकर मौद्रिक नीति में बदलाव का फायदा पहुंचाना है। 

एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने हाल में कहा था कि बैंक उधारी दरों से संबद्ध जमा दरों में कमी के लिए एक सीमा से आगे नहीं बढ़ सकते हैं। आरबीआई इस साल फरवरी से अभी तक अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 135 आधार अंक की कमी कर चुका है, जबकि बैंकों के नए कर्जों के लिए उधारी दरों में 44 आधार अंक की ही कमी की गई है।

सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़ चुकी हैं जमा दर

फॉर्मूले के तहत छोटी बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों को समान परिपक्वता की सरकारी प्रतिभूतियों से जोड़ दिया गया है और इनमें हर तिमाही में बदलाव किया जाता है। दूसरी तरफ 2019 में 10 साल के बेंचमार्क वाली सरकारी प्रतिभूति पर ब्याज दरें 80 आधार अंक की कमी आ चुकी है, जबकि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर में महज 10 आधार अंक की कमी हुई है।

पीपीएफ पर मिल रही 86 आधार अंक ज्यादा ब्याज

छोटी बचत योजनाओं पर दरें तय करने के स्वीकृत फॉर्मूले को देखें तो पीपीएफ पर ब्याज दर बाजार दर की तुलना में 86 आधार अंक ज्यादा है, जबकि किसान विकास पत्र पर 81 आधार अंक ज्यादा ब्याज मिल रही है। वहीं पांच साल की आवर्ती जमा (आरडी) जैसी योजनाओं पर ब्याज दर, बाजार दरों की तुलना में 135 आधार अंक ज्यादा है।

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