रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार से लघु बचत योजनाओं के लिए बाजार दरों के अनुरूप ब्याज दर में बदलाव करने के लिए कहा है। यह इस बात का संकेत है कि जनवरी-मार्च तिमाही में जमा दरों में बदलाव देखने को मिल सकता है। आरबीआई की यह पहल इसलिए भी अहम है, क्योंकि वित्त मंत्रालय 31 दिसंबर को जनवरी-मार्च तिमाही के लिए लघु बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों का एलान करेगा। इन्हीं दरों के आधार पर बैंक की जमा दरें तय होती हैं।
सूत्रों ने कहा कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें वाणिज्यिक बैंकों की मौजूदा दरों की तुलना में 100 आधार अंक यानी 1 फीसदी ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को भी तय फॉर्मूले के तहत छोटी बचतों पर लागू ब्याज दरों को घटाकर मौद्रिक नीति में बदलाव का फायदा पहुंचाना है।
एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने हाल में कहा था कि बैंक उधारी दरों से संबद्ध जमा दरों में कमी के लिए एक सीमा से आगे नहीं बढ़ सकते हैं। आरबीआई इस साल फरवरी से अभी तक अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर में 135 आधार अंक की कमी कर चुका है, जबकि बैंकों के नए कर्जों के लिए उधारी दरों में 44 आधार अंक की ही कमी की गई है।
फॉर्मूले के तहत छोटी बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों को समान परिपक्वता की सरकारी प्रतिभूतियों से जोड़ दिया गया है और इनमें हर तिमाही में बदलाव किया जाता है। दूसरी तरफ 2019 में 10 साल के बेंचमार्क वाली सरकारी प्रतिभूति पर ब्याज दरें 80 आधार अंक की कमी आ चुकी है, जबकि छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर में महज 10 आधार अंक की कमी हुई है।
छोटी बचत योजनाओं पर दरें तय करने के स्वीकृत फॉर्मूले को देखें तो पीपीएफ पर ब्याज दर बाजार दर की तुलना में 86 आधार अंक ज्यादा है, जबकि किसान विकास पत्र पर 81 आधार अंक ज्यादा ब्याज मिल रही है। वहीं पांच साल की आवर्ती जमा (आरडी) जैसी योजनाओं पर ब्याज दर, बाजार दरों की तुलना में 135 आधार अंक ज्यादा है।