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रिटायरमेंट प्लानिंग से ऐसे सुखमय बनाएं बुढ़ापा

Mon, 15 Jul 2013 01:00 AM IST
टीआर रामचंद्रन
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रिटायरमेंट के बाद का जीवन एक महत्वपूर्ण स्टेज है। इसके लिए हमें नौकरी के शुरुआती दिनों से ही बचत करनी चाहिए और ठोस प्लानिंग बनाकर चलना चाहिए।
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इससे जहां आप अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को स्वयं पूरा करने में सक्षम रहते हैं, वहीं स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए भी अपने बच्चों या परिजनों पर निर्भर नहीं रहते हैं।

साथ ही साथ अपनी इच्छानुसार कार्यों को कर सकते हैं। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए जरूरी है एक व्यवस्थित और निरंतर निवेश किया जाए।

सालाना खर्च
रिटायरमेंट प्लानिंग का पहला स्टेज यह है कि रिटायर होने के बाद भी वर्तमान जीवन शैली को बनाए रखने के लिए सालाना खर्च का एक अनुमान लगाया जाए। इसमें महंगाई दर को भी समायोजित करना चाहिए। साथ ही किसी आपात स्थिति में होने वाले संभावित खर्चों की भी गणना की जानी चाहिए।
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देश में अधिकतर लोग इन आवश्यकताओं के लिए मुख्य रूप से अपनी बचत और संग्रहीत भविष्य निधि (प्रोविडेंट फंड) पर निर्भर रहते हैं। लेकिन महंगाई की वर्तमान दर और बढ़ती हुई स्वास्थ्य लागतों को देखते हुए केवल बचत ही काफी नहीं है। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि एक व्यवस्थित फाइनेंशियल प्लानिंग बनाई जाए, जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रिटायरमेंट के बाद भी हम अपने वर्तमान जीवन स्तर बनाए रखें।

बाजार में निवेश के बहुत से विकल्प मौजूद हैं। यह विकल्प आपकी उम्र और जोखिम उठाने की क्षमता पर आधारित होते हैं। कुछ प्रभावी विकल्पों में रिटायरमेंट या पेंशन योजना, बंदोबस्ती उत्पाद और अन्य योजनाएं जैसे पब्लिक प्रोविडेंट फंड, एफडी और इक्विटी आदि शामिल हैं।

पेंशन प्लान
रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय पेंशन प्लान में निवेश करना एक बेहतर विकल्प है। इन्हें बीमा और म्यूचुअल फंड कंपनियां उपलब्ध कराती हैं। यह दीर्घ अवधि की योजनाएं होती हैं, जो आपकी रिटायरमेंट की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए फंड तैयार करती हैं।

बीमा योजनाएं आपको बीमित राशि का 30 फीसदी तक एकमुश्त प्राप्त करने का विकल्प देती हैं जबकि शेष राशि का भुगतान सालाना किया जाता है। इससे आपका पूरा पैसा एक ही बार में समाप्त नहीं होता और फंड आपको निरंतर मिलता रहता है।

यह एक अच्छा निवेश विकल्प है क्योंकि एक मुश्त दी गई राशि आपकी रिटायरमेंट जीवन की शुरुआत करने में सहायता करती है और नियमित होने वाली वार्षिक आय घरेलू और मेडिकल खर्च चलाने में सहायता करती है।

किसी भी व्यक्ति के लिए यह पेंशन प्लान उचित स्वास्थ्य बीमा योजना के साथ होनी चाहिए, क्योंकि केवल बचत बढ़ती हुई स्वास्थ्य लागत और आपात स्थिति की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती है।

एंडाउमेंट प्लान
एंडाउमेंट प्लान (बंदोबस्ती योजना) भी जोखिम से दूर रहने वाले ग्राहकों के लिए अच्छा विकल्प हो सकती हैं क्योंकि यह बीमा सहित निवेश योजनाएं होती हैं।

एंडाउमेंट प्लान में आपको एक अवधि तक नियमित प्रीमियम देना होता है और अंत में मैच्योरिटी पर आपको एक गारंटीशुदा राशि का भुगतान किया जाता है। यह एकमुश्त राशि या तो किसी कर्ज की देनदारी को चुकाने में प्रयोग की जा सकती है या निरंतर आय वाले किसी अन्य निवेश में लगाई जा सकती है, जो कि पॉलिसीधारक की वित्तीय स्थिति और लक्ष्यों पर निर्भर करती है।

इन योजनाओं में निवेश करने का लाभ यह है कि यदि पॉलिसीधारक की मौत पॉलिसी अवधि से पहले हो जाती है, तो भी बीमित राशि या जीवन सुरक्षा पॉलिसीधारक के नामिनी को दी जाती है, जिससे कि उसके परिवार की वित्तीय जरूरतें पूरी होती हैं। यह पारंपरिक बीमा उत्पाद होते हैं और इनमें जोखिम कम होता है क्योंकि इन पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं होता है।

पीपीएफ, एफडी व इक्विटी
रिटायरमेंट प्लानिंग के पोर्टफोलियो में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), सावधि जमा (एफडी) और इक्विटी को भी शामिल किया जा सकता है। महंगाई की लागत को कम करने के लिए इन्हें यूलिप और म्यूचुअल फंडों के जरिए खरीदा जा सकता है।

इक्विटी में निवेश व्यक्ति की जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है। जब एक व्यक्ति की उम्र ढलती है, तो उसमें औसतन जोखिम उठाने की क्षमता कम हो जाती है क्योंकि इक्विटी बाजार की अस्थिरता से सीधे-सीधे प्रभावित होता है।

इसलिए यदि आपकी जोखिम उठाने की क्षमता इक्विटी में सीधे निवेश की अनुमति नहीं देती, तो आप यूलिप में निवेश कर सकते हैं, क्योंकि वह एक लंबे समय में आपकी इक्विटी को आपके जोखिम के अनुसार समायोजित करती हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि जब आपकी बचत आपकी आवश्यकताओं के अनुसार पर्याप्त नहीं हैं, तो आपको इन योजनाओं के महत्व को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।

जिम्मेदारी व प्राथमिकता
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए कहां-कितना निवेश किया जाए, यह रिटायरमेंट के बाद आपकी जिम्मेदारियों और प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है। इसलिए निवेश के विकल्पों और राशि का चयन करने से पहले इन पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना नितांत आवश्यक है।

जैसे मान लीजिए, रिटायरमेंट के बाद आप अपना व्यापार शुरू करना चाहते हैं, तो आपको इक्विटी में अधिक से अधिक निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। लेकिन, यदि आप आराम से अपने सुनहरे दिनों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आप बांड में निवेश कर सकते हैं जो सुरक्षित होते हैं और अच्छा रिटर्न देते हैं।
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वहीं, यदि आप अपने बच्चों की उच्च शिक्षा और होम लोन की किश्तें देना चाहते हैं, तो आपको इनके लिए पहले ही प्लानिंग करनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े। निवेश का कोई भी विकल्प अपनाने से पहले उसमें निहित जोखिम, अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और लक्ष्यों को जान-समझ लेना चाहिए।

टीआर रामचंद्रन अवीवा लाइफ इंश्योरेंस एमडी एवं सीईओ हैं।
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