फॉर्म 16 के आभाव में सैलरी स्लिप की मदद से आप अपनी टैक्सेबल इनकम का आसानी से पता कर सकते हैं। सैलरी स्लिप में मौजूद एचआरए, एलटीए के अलावा पार्ट बी में मिलने वाले अन्य इन्वेस्टमेंट को डिडक्ट करके टैक्सेबल इनकम का पता कर सकते हैं।
अगर आप आईटीआर 2, 2ए या फिर आईटीआर 4 भर रहे हैं तो कंपनी की तरफ से मिले अप्वाइंटमेंट लेटर में लिखे सीटीसी ब्रेकअप को ध्यान से देंखे। इसके अलावा बैंक से मिले टीडीएस सर्टिफिकेट, रेंटल इनकम, कैपिटल गेन, 50 हजार रुपए से ऊपर के अमाउंट की कैश गिफ्ट और डिविडेंड इनकम को भी इसमें शामिल करें।
फॉर्म 26एएस से क्रॉसचेक करें टीडीएस
इनकम टैक्स एक्सपर्ट सीए अतुल गर्ग ने amarujala.com को बताया कि ऐसे लोगों को रिटर्न फाइल करने से पहले अपने टीडीएस को क्रॉसचैक करना चाहिए। इसके लिए फॉर्म 26एएस में सभी सोर्स से मिले टीडीएस के बारे में जानकारी होती है।
अगर आपको फॉर्म 26एएस और आईटीआर फॉर्म में सबमिट किए गए टीडीएस में जरा सा भी अंतर हुआ, तो आईटी डिपार्टमेंट आपको नोटिस भेज सकता है। इसके अलावा सेक्शन 80सी में जमा किए गए इन्वेस्टमेंट प्रूफ जैसे कि इन्श्योरेंस प्रीमियम, पीपीएफ, एनपीएस, बच्चों की ट्यूशन फीस और ईपीएफ को भी शामिल करें। इससे आपका आईटीआर फॉर्म बिना फॉर्म 16 के जमा हो जाएगा।