पिछले दिनों सरकार की ओर से आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों ने घरेलू इक्विटी बाजार में निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत किया है। 2012 की पहली छमाही में वैश्विक और घरेलू कारणों से दबाव में आए शेयर बाजार ने दूसरी छमाही में सुधार की ओर कदम बढ़ाए। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने देश के आर्थिक विकास पर अपना भरोसा जताया और 2012 के दौरान एफआईआई का निवेश इक्विटी बाजार में बढ़कर 24 अरब डॉलर हो गया।
विदेशी निवेशकों के मौजूदा रुझानों से लगता है कि 2013 में घरेलू शेयर बाजारों में विदेशी पूंजी की आवक बनी रहेगी। निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार से अन्य दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले अच्छा रिटर्न भी हासिल कर सकते हैं। सरकार की ओर से आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है।
2012 में घरेलू अर्थव्यवस्था में नए निवेश की शुरुआत ने सुधार और निवेशकों का भरोसा अर्थव्यवस्था में फिर से बहाल होने के संकेत दिए हैं। इससे लगता है कि 2013 में अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी के आने का सिलसिला जोर पकड़ सकता है। नीतिगत स्तर पर सरकार की ओर से दिखाई गई मजबूती ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
बीते साल सितंबर में सरकार ने ढांचागत सुधार, वित्तीय समेकन और अर्थव्यवस्था में निवेशकों का भरोसा बहाल करने की दिशा में कई उपायों की घोषणा की। सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए ईंधन की दामों में बढ़ोतरी, मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई को मंजूरी, बैंकिंग संशोधन विधेयक को पास कराने और विनिवेश को गति देने जैसे महत्वपूर्ण कदम सफलतापूर्वक उठाए हैं।
सरकार की हालिया दृढ़ता को देखते हुए लगता है कि वह आने वाले महीनों खासकर संसद के बजट सत्र के दौरान जीएसटी, डीटीसी, बीमा व पेंशन में एफडीआई को और उदार बनाने, भूमि अधिग्रहण विधेयक जैसे सुधार के कार्यक्रमों की दिशा में कदम बढ़ाएगी। सरकार को खनन और ऊर्जा सेक्टर की बाधाओं को दूर करने के भी उपाय करने चाहिए।
दूसरी ओर, महंगाई में नरमी आने के साथ ही चालू वित्तीय वर्ष की चौथी छमाही में रिजर्व बैंक ब्याज दरों के मोर्चे पर कुछ राहत देने के साथ आर्थिक विकास की ओर अपना ध्यान बढ़ा सकता है। इन सभी नीतिगत उपायों का आर्थिक विकास पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है और वित्तवर्ष 2014 में विकास दर करीब 6.3 फीसदी पर पहुंच सकती है।
आईटी, फार्मा के साथ बैंकिंग में बेहतर रिटर्न की उम्मीद
2013 में निवेश और रिटर्न के लिहाज से अनुकूल कुछ विशेष सेक्टरों की बात की जाए तो आईटी और फार्मा बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। आईटी कंपनियों से कम से कम 14-15 फीसदी की कमाई हो सकती है। जबकि, फार्मा में ग्रोथ 18-20 फीसदी रह सकती है। हालांकि, ब्याज दरों को लेकर संवेदनशील शेयरों से घरेलू बाजार में सबसे अधिक तेजी आने की उम्मीद है। इनमें बैंकिंग सेक्टर का खास योगदान रहेगा। ब्याज दरों में कमी आने से ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी दिखाई दे सकता है। वहीं, सकारात्मक रुझानों को देखकर लगता है कि सेंसेक्स अगले 6-9 महीनों में 21,000 के स्तर पर पहुंच सकता है। 2013 में मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।