वित्त मंत्री, अरुण जेटली ने बृहस्पतिवार को आशा जताई कि आर्थिक विस्तार के सालों तक गति हासिल किए रहने के चलते, भारत एक पूरी तरह से बीमित और सामाजिक रूप से सुरक्षित देश बन जाएगा।
भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हीरक जयंती (डायमंड जुबली) समारोह की लांचिंग के अवसर पर जेटली ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि एलआईसी इस लक्ष्य को हासिल करने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है।
श्रम सुधारों व अन्य चीजों के खिलाफ शुक्रवार को हड़ताल पर जाने वाली केंद्रीय श्रमिक यूनियनों पर अनायास ही निशाना लगाते हुए उन्होंने कहा कि उनका कॉन्ट्रीब्यूटरी सामाजिक सुरक्षा बजट प्रस्ताव हर तरफ से विरोध के चलते वापस ले लिया गया।
उन्होंने इसका भी उल्लेख किया कि कैसे श्रमिक यूनियनों ने 7वें वेतन आयोग का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि अब उन्हें इसमें कोई शक नहीं है कि एक दिन हम सामाजिक सुरक्षा व बीमा का महत्व समझेंगे और एक दिन पूर्ण रूप से सामाजिक तौर पर सुरक्षित राष्ट्र बन जाएंगे।
एलआईसी उदारीकरण के बाद भी ऐसा करने में सक्षम रहा
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16 साल पहले बाजार में प्रतिस्पर्धा शुरू हो जाने के बावजूद 70 फीसदी बाजार के साथ अग्रणी बने रहने के लिए जेटली ने एलआईसी की सराहना की। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि राज्य के बहुत ही कम एकाधिकार संस्थानों ने प्रतिस्पर्धी बाजार वातावरण में सफलता हासिल की और अभी भी बाजार में अग्रणी बने हुए हैं, जैसा कि सालों से एलआईसी ने किया।
सामान्यत: राज्य एकाधिकारों के लिए प्रतिस्पर्धी वातावरण में संघर्ष करना कठिन होता है क्याेंकि नौकरशाही बाधाओं से रहित निजी क्षेत्र ऐसे वातावरण में तेजी से बाजार केंद्रित निर्णय लेता है और फलता-फूलता है लेकिन एलआईसी उदारीकरण के बाद भी ऐसा करने में सक्षम रहा।
जेटली ने एलआईसी से अपनी उत्पाद पेशकशों और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में ज्यादा से ज्यादा इनोवेटिव बनने के लिए कहा ताकि निगम अपनी सेवा और लक्ष्यों की प्राप्ति को जारी रख सके।
विकास के लिए मजबूत बैंकिंग तंत्र है प्राथमिकता
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि देश के विकास के लिए बैंकिंग तंत्र में मजबूती सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए कई नए नियमों में संशोधन किए गए हैं। जेटली ने यह बात देश के बैंकिंग क्षेत्र के संगठन आईबीए की 69वीं आम बैठक में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि विकास की राह में बैंकिंग तंत्र में किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने दिवालिया कानून, कर्ज वसूली के सख्त नियम, प्रतिभूति कानून, बैंकों को वित्तीय मदद आदि मुद्दों का जिक्र किया और कहा कि सरकार किस तरह से बैंकिंग तंत्र की मजबूति के लिए प्रतिबद्ध है।
इसके अलावा सरकार ने क्षेत्रवार मजबूती के लिए भी आवश्यक कदम उठाए हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने इस्पात, ऊर्जा और चीनी क्षेत्र का हवाला दिया। उन्होंने इस बात पर जेर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिए जाने की जरूरत है।