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ई-गोल्ड ने बदला सोने में निवेश का अंदाज

Mon, 22 Oct 2012 08:25 PM IST
अंजनि सिन्हा (नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड)
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हमारे देश में सोने को परंपरागत रूप से निवेश का लाभप्रद और सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक माना गया है। हाल के वर्षों में सोने की कीमतों में दर्ज की गई तेज बढ़ोतरी ने इस धारणा को और भी मजबूत किया है। पिछले दस वर्षों के दौरान सोने ने जो रिटर्न दिया है, उसे देखते हुए काफी बड़ी संख्या में निवेशकों का रुझान सोने की ओर बढ़ा है।
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निवेशकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए सोने की खरीद-फरोख्त को सरल बनाने के लिए अब बाजार में सोने के कई ऐसे विकल्प भी उपलब्ध हो गए हैं, जिनमें निवेशक को किसी दुकान पर जा कर सोना खरीदने-बेचने का झंझट नहीं उठाना पड़ता। ऐसे विकल्पों में गोल्ड फंड, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (जी-ईटीएफ) और गोल्ड फंड ऑफ फंड (जी-एफओएफ) के साथ-साथ ई-गोल्ड खासतौर से उभर कर सामने आया है।

सुविधाजनक है सोने का डीमैट स्वरूप
ई-गोल्ड को तेजी से मिलती लोकप्रियता का कारण इसके जरिये निवेशकों को मिलने वाली तमाम तरह की सहूलियतें और सुविधाजनक स्वरूप है। इसमें सोने की शुद्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसमें भौतिक रूप से सोने की खरीदारी नहीं की जाती। खरीद और बिक्री दोनों ही लिखत-पढ़त में डीमैट स्वरूप में हो जाती है। इसके बावजूद निवेशक के पास यह विकल्प रहता है कि वह जब चाहे अपने द्वारा खरीदे गए सोने की डिलिवरी हासिल कर ले अथवा जरूरत समझे तो किसी दुकान या बाजार में गए बिना ही ई-ट्रांजेक्शन के जरिये सोना बेच कर अपने खाते में रकम हासिल कर ले। इसके लिए पास में किसी भी एक्सचेंज की सूची में शामिल किसी डिपॉजिटरी में एक डीमैट खाता होना जरूरी होता है।
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कम बैठती है निवेश की लागत
हमारे देश में ई-गोल्ड निवेश की शुरुआत नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) के जरिये हुई। एनएसईएल के ई गोल्ड की लोकप्रियता में सोने के बेहतरीन रिटर्न के साथ साथ इसमें निवेश या ट्रांजेक्शन की कम लागत और निवेश में कभी भी एंट्री और एक्जिट कर सकने की सुविधा की भी अहम भूमिका रही है। ई-गोल्ड में यह सभी सहूलियतें सोने में निवेश के निवेश के अन्य तरीकों से कहीं बेहतर हैं।

फिजिकल वैल्यू से जुड़ी है ट्रेडिंग
एनएसईएल ने 2010 में ई-गोल्ड ट्रेडिंग की शुरुआत की थी। इसके साथ ही एक फिजिकल कमोडिटी की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग का दौर हमारे देश में शुरू हो गया। इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में होने के बावजूद ई-गोल्ड ट्रेडिंग में सोने के दाम उसकी फिजिकल वैल्यू (भौतिक मूल्य) के अनुसार ही चलते हैं। बाजार में जब सोने की कीमत चढ़ती है तो ई-गोल्ड के दाम बढ़ जाते हैं और दाम घटने पर कीमत (वैल्यू) घट जाती है। बहरहाल वैल्यू की अगर बात की जाए तो, यह जान लेना उपयोगी होगा कि 2010 में लांचिंग के समय से अबतक की अवधि में ई-गोल्ड ने अपने निवेशकों को 87 फीसदी का मोटा रिटर्न दिया है, जो कि अन्य किसी निवेश में दिखाई नहीं देता।

देशभर में रहता है एक ही भाव
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे बड़े सराफा बाजारों में सोने की कीमतों में फर्क देखने को मिलता है, वहीं ई-गोल्ड की एक खूबी यह है कि इसमें देशभर में सोने के भाव एक ही रहते हैं। इसके चलते निवेशक देश के किसी भी कोने में सोने की खरीद-बिक्री एक ही भाव पर कर सकते हैं।

छोटे निवेशकों का है पूरा ख्याल
ई-गोल्ड की एक बहुत बड़ी खूबी यह है कि यह छोटे निवेशकों के लिए पूरी तरह मुफीद रहता है। इसमें निवेश का यूनिट एक ग्राम का होने के चलते निवेशक महज एक ग्राम जैसी छोटी मात्रा में भी सोने की खरीद-बिक्री कर सकते हैं। या चाहें तो अपने सोने की फिजिकल डिलिवरी प्राप्त कर सकते हैं। ई-गोल्ड की फिजिकल डिलिवरी की सुविधा फिलहाल देश के 13 शहरों में उपलब्ध है। यह डिलिवरी 1 ग्राम, 8 ग्राम, 10 ग्राम और एक किलोग्राम के यूनिटों और उसके गुणकों में हासिल की जा सकती है। फिजिकल डिलिवरी चाहने वाले निवेशकों को एनएसईएल शुद्धता की गारंटी के साथ सर्टिफाइड सोने की डिलिवरी प्रदान करता है। इसलिए सोने में खोट या मिलावट की आशंका नहीं रह जाती।

साढ़े 13 घंटे चलती है ट्रेडिंग
ई-गोल्ड में निवेश से जुड़ी एक सहूलियत यह भी है कि इसमें आप सुबह 10.00 बजे से लेकर रात के 11.30 बजे तक सोने की खरीद या बिक्री कर सकते हैं। कारोबार सोमवार से शुक्रवार तक हफ्ते में पांच दिन चलता है। इसमें क्लियरिंग और सेटलमेंट संबंधी भुगतान (पे-इन व पे-आउट) T+2 सेटेलमेंट साइकिल के तहत की जाती है। इस तरह ट्रेडिंग के दिन से दो दिन आगे (तीसरे दिन) क्लीयरिंग हो जाती है।  

सिक्के से बेहतर है ई-गोल्ड
सोने के गहनों में मिलावट की आशंका और भारी मेकिंग चार्ज के बोझ से बचने के लिए निवेशकों का रुझान हाल के वर्षों में बैंकों, डाकघर और विभिन्न वित्तीय संस्थानों द्वारा बेचे जाने वाले सोने के सिक्कों की खरीद की ओर बढ़ा है। इस मामले में ई-गोल्ड सोने के सिक्के से भी बेहतर साबित होता है। सिक्कों पर 10 से 12 फीसदी तक का मेकिंग चार्ज निवेशक को अदा करना पड़ता है, जबकि ई-गोल्ड में यह काफी कम बैठता है। दूसरी बात यह है कि बैंक अपने ग्राहकों को सोने के सिक्के को वापस खरीदने (बाय बैक) की सुविधा नहीं देते, लिहाजा सिक्के बेचने के लिए निवेशक को दुकानदारों के पास जाना पड़ता, जोकि कीमत में अच्छी खासी कटौती कर लेते हैं। ई-गोल्ड में कभी भी गोल्ड यूनिट की बिक्री की सुविधा के चलते यह झंझट नहीं रह जाता। साथ ही बिक्री की लागत भी नाममात्र की होती है।
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