साल 2013 में रीयल एस्टेट डेवलपरों के लिए पुराने प्रोजेक्ट के कर्ज को चुकाए बगैर बैंकों से नए कर्ज मिलना मुश्किल रहेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि डेवलपर जल्द से जल्द मौजूदा प्रॉपर्टी को बेचने की कोशिश करेंगे, ताकि पुराना कर्ज चुका सकें और नई परियोजनाओं के लिए कर्ज मिल पाए।
इस वजह से दिल्ली-एनसीआर में मकानों की कीमतों में बड़े सुधार की संभावना है। रिजर्व बैंक पहले ही आगामी मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान ब्याज दरों में कमी करने के संकेत दे चुका है। अगर ऐसा होता है तो बाजार में नकदी बढ़ेगी। ऐसे में खरीदारों को यह सलाह है कि अपने फैसले में जल्दबाजी न करें। बल्कि 2013 के पहले तिमाही के आखिर तक इंतजार करें। प्रॉपर्टी बाजार में निवेश के मामले में कुछ बुनियादी बातों का हमेशा ख्याल रखा जाना चाहिए।
प्रॉपर्टी में किए गए निवेश पर मिलने वाले रिटर्न का सीधा संबंध उस प्रॉपर्टी की उपयोगिता, संपर्क और आसपास के क्षेत्र के विकास व माहौल पर निर्भर करता है। इस लिहाज से दिल्ली-एनसीआर में द्वारका एक्सप्रेसवे, न्यू गुड़गांव, नोएडा एक्सटेंशन और एक्सप्रेसवे जैसे इलाके 2013 में भी निवेशकों को आकर्षित करते रहेंगे। लेकिन किसी भी प्रॉपर्टी में निवेश करने से पहले हाल के वर्षों में वहां दाम किस तरह बढ़े या घटे हैं, इस पर गौर करना भी जरूरी है।
जिस क्षेत्र में आप निवेश करना चाहते हैं वहां भविष्य में किस तरह की आर्थिक गतिविधियां, संस्थान और सुविधाएं होंगी इसका आकलन करना भी आवश्यक है। देश की बैंकिंग व्यवस्था की सख्ती के चलते भारत में प्रॉपर्टी बूम के बस्ट होने की स्थिति पैदा होने से बची रही है। इसलिए भारत में प्रॉपर्टी निवेश मध्यम से मध्यम या दीर्घ अवधि में ही अच्छे रिटर्न की उम्मीद की जाती है। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए हाउसिंग प्रॉपर्टी में निवेश के लिए चार से पांच साल की अवधि सबसे अधिक उपयुक्त है।