अगर आपने इन बैंकों में से किसी में एफडी खुलवा रखी है तो संभव है कि विलय के बाद आपके बैंक का नाम बदल जाए, लेकिन इस पर मिलने वाली ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि फिक्स डिपॉजिट या एफडी पर ब्याज का निर्धारण एक निश्चित अवधि के लिए होता है और बीच में इसमें बदलाव करना बैंकों के लिए संभव नहीं है। लिहाजा अगर विलय के बाद नई इकाई के जमा ब्याज दर में बदलाव भी होता है तो भी मेच्योरिटी तक आपकी एफडी पर पूर्व निर्धारित ब्याज ही मिलता रहेगा।
नहीं बढ़ेगा ईएमआई का बोझ
तीनों बैंकों में किसी से भी कर्ज लेने वाले धारकों को विलय से चिंतित होने की जरूरत नहीं है। विलय के बाद आपके कर्ज की राशि नई इकाई में स्थानांतरित हो जाएगी और ईएमआई पहले की तरह ही चुकाते रहेंगे।
अगर आपका कर्ज एमसीएलआर की दर पर आधारित है तो अवधि की समाप्ति पर नई दर के हिसाब से ईएमआई बनेगी। वहीं, ऐसे ग्राहक जिनका कर्ज आधार दर पर तय है, वे विलय के बाद आसानी से इसे एमसीएलआर में शिफ्ट करा सकते हैं। हालांकि इसके लिए बैंक वैल्यूएशन और प्रोसेसिंग फीस ले सकते हैं।
शेयरों की हो जाएगी अदला-बदली
भारतीय शेयर बाजार का प्रारूप ऐसा है कि यहां छोटे निवेशकों को बचाने के लिए कई रास्ते बनाए गए हैं। निवेशकों के शेयरों की अदला-बदली तय प्रारूप के हिसाब से स्वत: हो जाएगी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तय समय पर निवेशकों के डीमैट खाते से पहले जमा शेयर बाहर हो जाएंगे और उनकी जगह नए शेयर खाते में आ जाएंगे।
शेयरधारकों के लिए तय अनुपात के मुताबिक, विजया बैंक के शेयरधारक को प्रति 1000 शेयर पर बीओबी के 402 शेयर मिलेंगे जबकि देना बैंक के शेयरधारक को प्रति 1000 शेयर पर बीओबी के 110 शेयर मिलेंगे। यह अंतर शेयरों के वैल्यूएशन की वजह से आया है।