बहुत सी स्कीमों लोगों का पैसा यह सब्जबाग दिखाकर लगवाया जाता है कि यह एक रजिस्टर्ड कंपनी है अथवा आईएसओ प्रमाणपत्र प्राप्त कंपनी है। इन दोनों ही चीजों का निवेश स्कीम चलाने या लोगों से धन जुटाने की मंजूरी मिलने से कोई लेना-देना नहीं है। इसके लिए सेबी या भारतीय रिजर्व बैंक से मंजूरी लेनी होती है। अत: इस बारे में सुनिश्चित होने के बाद ही स्कीम में निवेश करें।
थर्ड पार्टी के नाम चेक न काटें
निवेश के लिए भुगतान का चेक उस संस्थान, कंपनी, फंड या बैंक आदि के नाम पर ही काटें। किसी व्यक्ति विशेष या थर्ड पार्टी के नाम चेक कतई न काटें। इसके अलावा ब्लैंक चेक या किसी सादे कागज पर दस्तखत न करें। यदि आप से ऐसा कुछ करने को कहा जाता है, तो जान लें कि कहीं न कहीं कोई गड़बड़झाला जरूर है।
अकाउंट स्टेटमेंट की करें मांग
कानूनी तौर पर दुरुस्त इनवेस्ट स्कीमों में निवेशकों को समय-समय पर उनके अकाउंट स्टेटमेंट जारी कर उनके निवेश की स्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है। स्टेटमेंट जारी करने का अंतराल मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक हो सकता है, लेकिन अगर कंपनी आपको कोई स्टेटमेंट नहीं दे रही है, तो कहीं न कहीं गड़बड़ी जरूर है।
दावों और प्रदर्शन की तुलना करके देखें
स्कीम का प्रदर्शन निवेशकों से किए वायदों के अनुरूप होना चाहिए। यह देखने के लिए आपको स्वयं कंपनी के दावों और वास्तविक प्रदर्शन की तुलना करके देखना चाहिए। यदि ऐसा नहीं है, तो आप इसकी वजह पूछते हुए कंपनी से स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। कोई जवाब या स्पष्टीकरण न मिलने पर आगे की कार्यवाही पर भी विचार किया जा सकता है।
निवेशक अगर थोड़ी सतर्कता से काम लें तो वह फर्जी स्कीमों के जंजाल से फंसने से खुद को बचा सकते हैं। पहली चीज यह समझ लेनी चाहिए कि किसी भी स्कीम में किसी एजेंट या एडवाइजर के कहने भर से पैसा न लगाएं। पैसा लगाने व अन्य लोगों को जोड़ने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार कर लेना बहुत जरूरी है।