निवेश के नए विकल्प आने के बाद बरेली शहर के लोग अब स्मार्ट निवेशक के रूप में निवेश कर रहे हैं। शहरवासी निवेश में सबसे ज्यादा जोर बेहतर रिटर्न और कम जोखिम के बीच संतुलन बनाने को दे रहे हैं। इसी के तहत कमोडिटी एक्सचेंज, शेयर मार्केट और बुलियन बाजार में निवेश कर रहे हैं।
बाजार के जानकारों के मुताबिक शहर के करीब 60-70 हजार निवेशक ऐसे हैं, जो नए निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। निवेशक कमोडिटी एक्सचेंज में निवेश करने के अलावा सोने और चांदी में निवेश की ओर खास जोर दे रहे हैं। कमोडिटी एक्सचेंज में करीब 500 करोड़ रुपये का टर्नओवर पहुंच चुका है।
शहर के निवेशक कंपनियों के शेयर में निवेश करने के मामले में चुनिंदा कंपनियों को ही तरजीह दे रहे हैं। वह उन्हीं कंपनियों में निवेश कर रहे हैं, जिनकी साख मजबूत है और उनमें जोखिम कम है। इसी की वजह से शेयर बाजार में निवेश का आंकड़ा जो कभी 300-400 करोड़ रुपये का था, वह अब घटकर आधा रह गया है।
छोटे शहरों में निवेश के बदलते तरीके से वित्तीय कंपनियां काफी उत्साहित हैं। इसी वजह से कंपनियां अपनी विस्तार योजनाओं में छोटे शहरों पर खास तौर से जोर दे रही हैं। देश की सबसे बड़ी असेट मैनेजमेंट कंपनी रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (आरसीएएस) की रणनीति अगले पांच साल में देश के सभी करीब 600 जिलों में पहुंच बनाने की है।
इस समय कंपनी देश के 200 शहरों में मौजूद है और अगले दो साल में इन शहरों की संख्या 400 करने की कंपनी की रणनीति है, जबकि उसके बाद करीब तीन साल में कंपनी देश के सभी जिलों में अपनी पहुंच बनाने तैयारी में है। कंपनियों के इस रुख के चलते आने वाले दिनों में छोटे शहर के ग्राहकों को न केवल निवेश के कई विकल्प मिलेंगे, बल्कि कंपनियां ग्राहकों को मेट्रो शहरों जैसी सुविधाएं भी देंगी, जिसकी वजह से निवेशकों की संख्या में भी तेजी से इजाफा होने की संभावना है।
शहर के लोगों का सुरक्षित निवेश की तरफ रुख करने की एक प्रमुख वजह यह भी रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों ने मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) आदि क्षेत्रों में निवेश किया है। जहां उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ा। वेल्थ डिस्कवरी सेक्योरिटी के सीईओ राजीव अग्रवाल के अनुसार एक समय एजुकेशन सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ा था। आर्थिक सुस्ती की वजह से हालांकि अब निवेशकों ने एजुकेशन सेक्टर में निवेश करने में कमी कर दी है।