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बच्चे का भविष्य सुरक्षित करे चाइल्ड प्लान

Mon, 04 Feb 2013 03:20 PM IST
अनुज भागिया
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बच्चा अपने कैरियर में कामयाबी की बुलंदियां छुए यह कामना तो हर किसी की होती है, पर जब बात बच्चे के भविष्य की आर्थिक या वित्तीय प्लानिंग की आती है, तो कई बार इसे लेकर हमारी तैयारियां हकीकत के धरातल पर नाकाफी ठहरती हैं। हम चाहते हैं, बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, पायलट, आला अधिकारी, उद्यमी, संगीतकार या अंतरिक्ष यात्री बने, पर इसे लेकर हम जो फाइनेंशियल प्लानिंग करते हैं, वह उस समय के हिसाब से अपर्याप्त होती है, क्योंकि उस समय तक फीस और खर्चे इत्यादि हमारी सोच से काफी अधिक बढ़ चुके होते हैं। इसलिए चाइल्ड प्लान में निवेश करते वक्त यथार्थवादी और संतुलित रवैया अपनाना बेहद जरूरी है।
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बाजार में आज विभिन्न कंपनियों के ढेरों चाइल्ड प्लान मौजूद हैं। स्कीमों की इतनी भारी तादाद और अपने प्लान के समर्थन में भारी-भरकम दावों के चलते अकसर अभिभावक पसोपेश में पड़ जाते हैं कि किसी चाइल्ड प्लान का चुनाव उनके लिए सबसे बेहतर रहेगा। अपनी क्षमता और लक्ष्य के हिसाब से पारंपरिक या यूनिट लिंक्ड किसी भी तरह के चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान का चुनाव किया जा सकता है, पर प्लान का चुनाव उसे तीन मूलभूत कसौटियों पर परख कर ही करना चाहिए।
:- आपके बच्चे की जरूरत के हिसाब से भुगतान
:- बीमित माता या पिता की मृत्यु के बाद भी वित्तीय मदद
:- आपके बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्याप्त संग्रहित राशि

पारंपरिक चाइल्ड प्लान
पारंपरिक चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान में बीमित रकम का ज्यादातर हिस्सा ऋण (डेट) आधारित योजनाओं में निवेश करके तयशुदा वक्त पर निश्चित परिवक्वता राशि (सम एश्योर्ड) के भुगतान की गारंटी दी जाती है। पारंपरिक चाइल्ड प्लान में कम जोखिम होता है, क्योंकि इनमें निर्धारित रिटर्न मिलने की गारंटी होती है। माता-पिता को भी पता होता है कि उन्हें उस समय कितनी रकम मिलेगी। ऐसी योजनाएं उन माता-पिता के लिए ठीक होती हैं, जो बहुत ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।
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यूनिट लिंक्ड प्लान
ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता रखने वाले माता-पिता अपने बच्चे के लिए यूनिट लिंक्ड चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) ले सकते हैं। ये प्लान इक्विटी और ऋण बाजार में निवेश करते हैं। ऐसी योजनाओं में लंबी अवधि (15-20 साल) में इक्विटी से काफी अच्छा रिटर्न हासिल हो सकता है। अगर सही से चयन किया गया तो इक्विटी में एक संतुलित एलोकेशन वाला यूलिप प्लान15-20 साल की अवधि में आपकी रकम में भारी-भरकम काफी इजाफा कर सकता है।
 
कई तरह के राइडर की भी सुविधा
चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय उसके साथ जुड़े राइडर को समझना बेहद अहम है। आजकल ज्यादातर चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान में ही राइडर शामिल होते हैं। अगर प्लान के साथ ही कुछ राइडरों को शामिल नहीं किया गया हो तो वे पॉलिसी पर एड-ऑन के तौर पर भी उपलब्ध होते हैं। चाइल्ड प्लान से जुडे़ राइडर भी उतने ही अहम होते हैं, जितना कि प्लान। सही राइडर चुनकर चाइल्ड प्लान को और भी सुरक्षित और अपनी जरूरतों को पूरा करने वाला बनाया जा सकता है। चाइल्ड प्लान में मुख्यत: चार तरह के राइडर उपलब्ध होते हैं।

1- प्रीमियम वेवर
इसके तहत पॉलिसीधारक की मृत्यु होने या स्थायी अपंगता के चलते प्रीमियम का भुगतान करने में असमर्थ होने पर तो बेस पॉलिसी और राइडर के लिए भविष्य के सभी प्रीमियम माफ कर दिए जाते हैं। यहां ध्यान देने की जरूरत है कि इन राइडर के तहत किए गए प्रीमियम भुगतान पर धारा 80सी के तहत कर लाभ मिलता है।

2- गंभीर बीमारी लाभ राइडर
किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आने का मतलब ढेर सारा खर्च है। इस खर्च की मार न सिर्फ आपकी बचत पर पड़ती है, बल्कि इसकी वजह से आपको चाइल्ड प्लान का सालाना प्रीमियम का भुगतान करने में भी मुश्किल पेश आती है। इस स्थिति में ज्यादातर बीमा कंपनियां गंभीर बीमारी राइडर मुहैया कराती हैं, जो पॉलिसीधारक को कुछ खास गंभीर बीमारियों के खिलाफ कवर देता है। यह कोई अहम अंग प्रत्यारोपण, दिल का दौरा, लकवा या संपूर्ण किडनी फेल्योर वगैरह भी हो सकता है। इस राइडर को लेने वाला पॉलिसीधारक गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है, तो राइडर के तहत बीमित रकम का भुगतान पॉलिसीधारक को कर दिया जाता है।

3- आय लाभ राइडर
पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर वित्तीय अभाव में बच्चे की परवरिश करना बेहद मुश्किल होता है। इस राइडर के तहत पॉलिसी अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर पॉलिसी के परिपक्व होने तक लाभार्थी को प्रत्येक पॉलिसी वर्षगांठ पर राइडर की बीमित राशि की 10 फीसदी रकम का सालाना भुगतान किया जाता है। इस तरह के सालाना भुगतान की मदद से बच्चे को उसके शुरुआती वर्षों में वित्तीय मदद मिलती रहती है।
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