महामारी का असर देश की अर्थव्यवस्था के साथ लोगों की जेब पर भी पड़ा है। नौकरियां जाने और कमाई ठप होने से उनपर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी (सीआईसी) की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, देश की कुल 40 करोड़ कामकाजी आबादी में करीब आधे लोग कर्जदार हैं। उन्होंने खर्च चलाने के लिए कम-से कम एक बार कर्ज लिया है या उनके पास क्रेडिट कार्ड है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी, 2021 तक देश की कुल कामकाजी आबादी 40.07 करोड़ थी। इनमें से 20 करोड़ लोगों ने खुदरा कर्ज बाजार से किसी-न-किसी रूप में कर्ज लिया है।
ट्रांसयूनियन सिबिल के मुताबिक, कर्जदाता संस्थान नए ग्राहकों तक अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं क्योंकि पुराने ग्राहकों में आधे से ज्यादा कर्जदार उनके मौजूदा ग्राहक हैं।
मार्च में ही पर्सनल लोन 13.5% बढ़ा: आरबीआई
रिजर्व बैंक ने मंगलवार को बताया कि मार्च, 2021 में ही पर्सनल लोन 13.5% बढ़ गया , लेकिन औद्योगिक कर्ज की मांग कम रही। मार्च तिमाही में निजी बैंकों ने सबसे ज्यादा कर्ज बांटे और कुल कर्ज में उनकी हिस्सेदारी 36.5% पहुंच गई , जो एक साल पहले 35.4% और पांच साल पहले तक 24.8% थी। घरेलू कर्ज में सालाना आधार पर 10.9 फीसदी वृद्धि हुई है।
महिला कर्जदारों की हिस्सेदारी कम
ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में 18-33 वर्ष के 40 करोड़ लोगों के बीच कर्ज बढ़ने की संभावनाएं ज्यादा हैं, क्योंकि इस श्रेणी में कर्ज का प्रसार 8% है। महिला कर्जदारों की हिस्सेदारी ऑटो लोन में 15% , उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के लिए लोन में 25%, पर्सनल लोन में 22% और होम लोन में 31 फीसदी है।