मोदी सरकार बुधवार को वेज बिल पर अपनी मंजूरी दे सकती है। देर शाम तक होने वाली इस बैठक में सरकार इस लंबित बिल को पास कर सकती है। अगर आज कैबिनेट इस संशोधित बिल को अपनी मंजूरी दे देती है, तो फिर जीएसटी के बाद पूरे देश में एक वेतन का सपना पूरा होने में ज्यादा दिन नहीं लगेंगे। इससे उन लोगों को फायदा मिलेगा, जो कि एक ही सेक्टर में नौकरी करते हैं, लेकिन हर व्यक्ति की तनख्वाह एक दूसरे से कम या फिर ज्यादा होती है।
केंद्र सरकार इसको लागू करने के लिए संसद के मानसून सत्र में विधेयक लेकर आएगी। इससे पहले आज बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस विधेयक के मसौदे को हरी झंडी दी जा सकती है। 12 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर फैसला लिया जाना था, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते यह बिल लटक गया था।
खत्म होगी अलग-अलग मजदूरी की दर
संसद में इस बिल के पास हो जाने के बाद पूरे देश में मजदूरी की दर एक हो जाएगी। अभी कई राज्यों में मजदूरी दर एक समान नहीं है। केंद्र द्वारा मजदूरी की दर तय करने के बाद राज्य सरकारों को कम से कम इतना पैसा मजदूरों के लिए फिक्स करना होगा।
नए कानून के बाद खत्म हो जाएंगे ये चार एक्ट
फैक्ट्री में काम करते मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
नए कानून के लागू हो जाने के बाद सरकार फिलहाल चल रहे चार एक्ट खत्म कर देगी। ये एक्ट हैं, मिनिमम वेजेस एक्ट 1948, पेमेंट ऑफ वेजेस एक्ट 1936, पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 और समान पारितोषिक एक्ट 1976।
इसके साथ ही सरकार अभी चल रहे 44 अन्य लेबर एक्ट को भी खत्म कर देगी। इससे कारोबारियों के लिए बिजनेस करना आसान हो जाएगी, वहीं मजदूरों को भी ज्यादा मजदूरी मिलने लगेगी। हर दो साल में मजदूरी की दरों में परिवर्तन किया जा सकेगा।
18 हजार सैलरी पाने वालों को भी मिलेगी राहत
श्रम मंत्रालय इस मानसून सत्र में 'वेज बिल' को सदन के पटल पर रखेगा, जो अगले माह से शुरू हो रहा है। इसके तहत सभी मजदूरों और फैक्ट्रियों के कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी। इस बिल में 18 हजार से अधिक की मासिक आमदनी वाले मजदूरों को भी शामिल किया जाएगा, जो अबतक वेज बिल से बाहर थे।
श्रम मंत्रालय के सेक्रेटरी एम सत्यवती ने कहा कि उनका मंत्रालय मानसून सत्र में मजदूरों का भला करने वाले इस बिल को सदन में रखेगा। श्रम मंत्रालय के इस बिल को वित्तमंत्री अरुण जेटली पहले ही हरी झंडी दे चुके हैं। अब श्रम मंत्रालय इस बिल को यूनियन कैबिनेट द्वारा कानून मंत्रालय से पास कराने के क्रम में लगा हुआ है।