अगर आप आजकल हर कीमती उत्पाद ईएमआई पर खरीदते हैं तो फिर ऐसा करना बंद कर दें। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तरह का कार्य करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर काफी नकारात्मक असर पड़ता है। वहीं इस तरह से उत्पाद खरीदना भी महंगा पड़ता है।
ईएमआई पर सामान खरीदने से केवल एक फायदा होता है। वो फायदा यह है कि आपको एक साथ पैसा नहीं देना पड़ता है। छोटी-छोटी किस्त के जरिए आप तीन से लेकर के एक साल में पैसा चुका सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद हर वक्त इस तरह से सामान खरीदना कई मुश्किलें ला सकता है।
आजकल बैंक और ई-कॉमर्स कंपनियां नो कास्ट ईएमआई पर भी सामान खरीदने की सुविधा दे रही हैं। यह ऑफर मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और एसी खरीदने पर दिया जा रहा है।
अगर आपको लगता है कि नो कॉस्ट ईएमआई पर सामान खरीदना महंगा नहीं है, तो फिर यह गलत सोच है। नॉर्मल ईएमआई हो या फिर नो कॉस्ट ईएमआई आप हमेशा एमआरपी से ज्यादा पैसा चुकाते हैं।
इस तरह की स्कीम पर आपको 16 से 24 फीसदी ब्याज देना होता है। बैंक आपसे पर्सनल लोन पर लगने वाले ब्याज दर को ही नो कॉस्ट ईएमआई में लिया जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक के सर्कुलर के अनुसार जीरो या फिर नो कॉस्ट ईएमआई का सिद्धांत ही नहीं है। बैंक व अन्य वित्तीय कंपनियां इसको केवल मार्केटिंग छलावा है, क्योंकि किसी को भी कुछ सस्ता नहीं मिलता है।
प्रत्येक ईएमआई में बैंक ब्याज भी जोड़कर चलते हैं। इसी आधार पर किश्त बनती है। मान लीजिए आपने 20 हजार का फोन लिया और उस पर कंपनी ने पांच हजार की छूट दे दी। अब आपने उसको एक साल के समयवधि के लिए ईएमआई पर लिया है।
अगर ब्याज न लिया जाए तो फिर हजार रुपये प्रति महीने की किश्त बनेगी। लेकिन ऐसा नहीं है। आपको यह फोन ब्याज मिलाकर 20 हजार रुपये से ज्यादा का ही पड़ेगा। इसलिए ऐसे छलावे में आने से पहले पूरी तरह से ईएमआई के नियम व शर्तों को पूरी तरह से पढ़ लें।